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    सोयाबीन से बनी 51 हजार दानों की गणपति प्रतिमा, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

    सागर/बीना: 27 अगस्त से गणेशोत्सव का पर्व शुरू होने जा रहा है. ऐसे ही सागर जिले के बीना के एक स्थानीय मूर्ति कलाकार अशोक साहू पिछले 38 सालों से पर्यावरण को ध्यान में रखकर केवल एक ही इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा बना रहे हैं. इस बार भी उन्होंने करीब सोयाबीन की 51 हजार बड़ी से 21 किलो वजन की 7 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा को तैयार किया है.

    छह माह में तैयार हुई प्रतिमा
    73 वर्षीय मूर्तिकार अशोक साहू ने बताया कि, ''प्रतिमा को बनाने के लिए 21 किलो सोयाबीन की बड़ी का उपयोग किया गया है. जिन्हें छलनी से घिस कर चौकोर किया गया. बाद में प्रतिमा के करीब 60-65 अलग-अलग हिस्सों को फेविकोल की मदद से बिना सपोर्ट के तैयार किया गया. जिन्हें बाद में एक प्रतिमा को मूर्त रूप दिया गया है.'' उन्होंने बताया कि, ''प्रतिमा को बनाने में करीब 6 माह का समय लगा है. जिसकी स्थापना सर्वोदय चौक स्थित श्री कौशल किशोर देव राम जानकी साहू समाज मंदिर में की जाएगी.''

     

    प्रतिमा में नहीं हुआ कलर का उपयोग
    मूर्तिकार अशोक साहू ने बताया, ''प्रतिमा बनाने में सोयाबीन की बड़ी एवं फेविकोल का उपयोग किया गया है. इन्हीं के उपयोग से प्रतिमा के अलावा कपड़े, सिंहासन, हार, मुकुट, वाहन चूहा आदि सभी सोयाबीन की बड़ी से तैयार किए गए हैं. कलर की जगह सुनहली का उपयोग किया गया है. जिससे प्रतिमा विसर्जन के बाद नदी के जीव जंतु को नुकसान नहीं होगा.''

    इस बार 38 वीं प्रतिमा को दिया अंतिम रूप
    मूर्तिकार अशोक साहू ने बताया कि, ''अन्य तरह की प्रतिमाओं से प्रदूषण बढ़ने का खतरा रहता है, इसलिए इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा तैयार की है. इस तरह की प्रतिमा का जब विसर्जन किया जाता है तो वह पूरी तरह से नदी तालाब में समा जाती है और इसमें जो तत्व रहते हैं जो जलीय जंतुओं का आहार बन जाते हैं. इस बार जो प्रतिमा बनाई गई है वह 38वीं है.''

    उन्होंने बताया कि, ''वह पूर्व में बूंदी, दाल, मखाना, नमकीन सेब, मक्का, धनिया, साबूदाना, लड्डू, चना, गरी, मूंगफली, नारियल एवं मुरमुरा सहित अन्य वस्तुओं से प्रतिमाओं का निर्माण कर चुके है. जो आकर्षण का केंद्र तो रही साथ ही पर्यावरण को सुरक्षित रखने का भी प्रयास किया गया.''

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