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    गहलोत का BJP पर बड़ा वार, बोले- हिंदू धर्म की राजनीति करने वालों की खुली पोल

    जयपुर। राजस्थान की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक डिग्गी कल्याणधणी की 61वीं लक्खी पदयात्रा 18 अगस्त से जयपुर के चौड़ा रास्ता स्थित ताड़केश्वर महादेव मंदिर से शुरू होने जा रही है। टोंक जिले के डिग्गी स्थित कल्याणधणी मंदिर तक जाने वाली लगभग 90 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा में प्रदेशभर से 9 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान है। हालांकि, यात्रा की तारीख नजदीक आने के बावजूद सांगानेर से रेनवाल तक के यात्रा मार्ग पर तैयारियों और व्यवस्थाओं का कोई ठोस रोडमैप सामने नहीं आया है।

    पूर्व सीएम अशोक गहलोत का तंज: "आस्था के साथ लापरवाही बर्दाश्त नहीं"

    लक्खी पदयात्रा मार्ग की खस्ताहाल स्थिति को लेकर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पर जोरदार हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर गहलोत ने लिखा कि धर्म के नाम पर राजनीति करने वाली भारतीय जनता पार्टी की सच्चाई अब जनता के सामने आ रही है।

    • खस्ताहाल सड़कें और नाले: पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि 25 किलोमीटर लंबे यात्रा मार्ग पर जगह-जगह सड़कें टूटी हुई हैं, बारिश के कारण गहरे गड्ढे बन गए हैं और पिछले डेढ़ साल से नालों की सफाई तक नहीं हुई है।

    • विभागीय अनदेखी: नगर निगम, जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) और सड़क निर्माण निगम जैसे जिम्मेदार महकमों के बावजूद तैयारियां बेहद अधूरी हैं।

    • त्वरित कार्रवाई की मांग: गहलोत ने कहा कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। सरकार को तुरंत सड़क मरम्मत, सफाई और सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने चाहिए ताकि कोई बड़ा हादसा न हो।

    90 किलोमीटर की राह में श्रद्धालुओं के लिए चुनौतियां

    यह पदयात्रा 18 अगस्त को जयपुर से रवाना होकर विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए 22 अगस्त को डिग्गी पहुंचेगी। इसमें जयपुर के अलावा टोंक, दौसा, अजमेर, सवाई माधोपुर, नागौर और सीकर से भारी संख्या में पदयात्री शामिल होंगे।

    • प्रशासनिक बैठकों का अभाव: श्रद्धालुओं का आरोप है कि वीवीआईपी मूवमेंट या रैलियों के लिए जिस तरह प्रशासनिक तंत्र सक्रिय रहता है, वैसी गंभीरता इस लक्खी यात्रा के लिए नहीं दिखाई जा रही है।

    • जोखिम भरा सफर: गड्ढों, बिखरी गिट्टियों और अधूरे निर्माण कार्यों के कारण पैदल यात्रियों के लिए 90 किलोमीटर का यह सफर काफी थकाऊ और जोखिम भरा साबित हो सकता है।

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