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    OMR शीट विवाद पर गहलोत का बयान, विपक्ष पर साधा निशाना

    जयपुर|मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के हालिया बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तीखा पलटवार किया है। गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके खिलाफ बयानबाजी करने से प्रदेश के युवाओं को न्याय नहीं मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी पर आरोप नहीं लगा रहे हैं, बल्कि उन्हें मिले फीडबैक के आधार पर युवाओं के हित में सरकार से सवाल कर रहे हैं।अशोक गहलोत ने लिखा कि “मुख्यमंत्री भजनलाल जी, मैंने तो अभी आपके ऊपर कोई आरोप नहीं लगाए हैं। मैं तो मुझे मिले फीडबैक के आधार पर युवाओं के हित में आपसे आग्रह कर रहा हूं।” उन्होंने कहा कि उनकी मंशा केवल यह जानने की है कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर युवाओं के मन में जो शंकाएं हैं, उनका समाधान सरकार कब और कैसे करेगी।पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि वर्ष 2024 और 2025 में हुई भर्ती परीक्षाओं में ओएमआर शीट बदली गई हैं या नहीं। गहलोत ने लिखा कि प्रदेश का युवा इस सवाल का सीधा जवाब चाहता है, क्योंकि लगातार ऊंची कट-ऑफ जाने से इस विषय को लेकर संदेह और गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है, क्योंकि इन्हीं परीक्षाओं के आधार पर लाखों युवाओं का भविष्य तय होता है।गहलोत ने आगे कहा कि यदि ओएमआर शीट में किसी भी स्तर पर हेरफेर हुई है, तो सरकार को उनकी सरकार के कार्यकाल में बनाए गए सख्त कानून के तहत कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि उनकी सरकार ने पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामलों को रोकने के लिए कड़ा कानून बनाया था, जिसमें दोषियों को आजीवन कारावास, 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना और संपत्ति जब्ती का प्रावधान है।पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर वर्तमान सरकार वास्तव में युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है, तो उसे राजनीतिक बयानबाजी छोड़कर ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “हम आपकी तरह जनता को भ्रमित करने वाले आरोप नहीं लगा रहे। हमारा उद्देश्य सिर्फ यह है कि युवाओं को न्याय मिले और भर्ती प्रक्रियाओं पर उनका भरोसा कायम रहे।”गहलोत ने यह भी कहा कि राजस्थान में पहले ही भर्ती परीक्षाओं को लेकर कई विवाद सामने आ चुके हैं। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वह हर स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित करे। उन्होंने मांग की कि यदि किसी भी भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।राजनीतिक गलियारों में गहलोत के इस बयान को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर सीधा दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि पार्टी लगातार युवाओं के मुद्दों को उठा रही है और आगे भी सरकार से जवाब मांगती रहेगी। वहीं, भाजपा नेताओं का आरोप है कि विपक्ष बेवजह आशंका फैलाकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है।फिलहाल, गहलोत के इस पलटवार के बाद प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। भर्ती परीक्षाओं और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों पर अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है। यह देखना अहम होगा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इन आरोपों और सवालों पर क्या स्पष्ट जवाब देते हैं और क्या सरकार युवाओं की शंकाओं को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम उठाती है।

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