More
    Homeराज्यछत्तीसगढ़हरा सोना’ बना समृद्धि का आधार : तेंदूपत्ता खरीदी की बढ़ी दर...

    हरा सोना’ बना समृद्धि का आधार : तेंदूपत्ता खरीदी की बढ़ी दर ने संग्राहकों का बढ़ाया उत्साह व भरोसा, हर फड़ पर रौनक

    रायपुर : जेठ की तपती धूप के बीच रामपुर के जंगलों में एक बार फिर ‘हरे सोने’ यानी तेंदूपत्ता संग्रहण की रौनक लौट आई है। लंबे इंतजार के बाद शुरू हुए इस सीजन ने ग्रामीणों, खासकर महिलाओं के चेहरों पर नई उम्मीदों की मुस्कान ला दी है। इस वर्ष संग्रहण कार्य की विधिवत शुरुआत रामपुर केंद्र में पूजा-अर्चना के साथ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिला हितग्राही शामिल हुए।

    सुबह सूरज उगने से पहले ही कोरबा जिले के रामपुर की कारी बाई पटेल और खेमबाई पटेल अपने परिवारों के साथ जंगल पहुँच गई थीं। दोपहर होते-होते जब वे तेंदूपत्ते की गड्डियाँ लेकर खरीदी केंद्र पहुँचीं, तो वहाँ का माहौल उत्सव जैसा दिखाई दिया। कई तेंदूपत्ता संग्राहकों के बीच दोनों ने खरीदी केंद्र में आज की ‘बोहनी’ की।

    कारी बाई ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी खरीदी समय पर शुरू होने से उन्हें बिचौलियों से राहत मिली है। सीधे फड़ में पत्ता बेचने से उचित पारिश्रमिक और बोनस की गारंटी मिलती है, जिससे पूरे साल का आर्थिक प्रबंधन सुगमता से चलता है।

    शासन द्वारा इस वर्ष तेंदूपत्ता खरीदी की दर बढ़ाकर 4 हजार रुपये से 5500 रुपये प्रति मानक बोरा करने का सकारात्मक असर ग्रामीण परिवारों की आय पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। बढ़े हुए दर से संग्राहकों का उत्साह व भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है। रामपुर क्षेत्र में तेंदूपत्ता सीजन जनजातीय परिवारों के लिए आजीविका का मुख्य आधार है। सावधानी से पत्ता तोड़ना, छंटाई करना और गड्डियाँ तैयार करना एक कठिन परंतु महत्वपूर्ण कार्य है, जिसमें महिलाओं की भूमिका विशेष रूप से अहम है।

    वनोपज समिति प्रबंधकों के अनुसार इस वर्ष खरीदी व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। फड़ में गड्डियों की गिनती और गुणवत्ता परीक्षण आधुनिक मापदंडों के आधार पर किया जा रहा है। संग्राहकों के बैंक खातों में पारिश्रमिक का भुगतान डिजिटल माध्यम से तुरंत सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे किसी प्रकार की देरी या असुविधा न हो।

    अनुकूल मौसम के कारण इस बार पत्तों की गुणवत्ता बेहतर है, जिससे संग्राहकों की आय बढ़ने की संभावना और मजबूत हो गई है। ग्रामीणों के लिए ‘हरा सोना’ केवल एक वनोपज नहीं बल्कि उनके स्वावलंबन और आर्थिक स्थिरता का आधार बन गया है।

    प्रशासन ने सभी संग्राहकों से अपील की है कि वे शासन द्वारा निर्धारित दरों और मानकों का पालन करते हुए अपना तेंदूपत्ता केवल सहकारी समिति केंद्रों पर ही बेचें, जिससे उन्हें योजनाओं व बोनस का पूरा और सीधा लाभ मिल सके। रामपुर की मेहनतकश महिलाओं की लगन, जंगलों की हरियाली और शासन की दूरदर्शी पहल… इन तीनों ने मिलकर ‘हरे सोने’ को ग्रामीण समृद्धि का सशक्त माध्यम बना दिया है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here