बांसवाड़ा: बांसवाड़ा-डूंगरपुर के सांसद राजकुमार रोत द्वारा संसद में उठाए गए एक महत्वपूर्ण प्रश्न के उत्तर में केंद्र सरकार ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में मातृ स्वास्थ्य की एक बेहद गंभीर और चिंताजनक तस्वीर पेश की है। सरकार द्वारा प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार एनएफएचएस-5 के समय डूंगरपुर जिले की 15 से 49 वर्ष की आयु सीमा वाली लगभग 72.6 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया यानी खून की कमी से पीड़ित पाई गई हैं, जो राज्य के औसत 54.4 प्रतिशत से काफी अधिक है। इसके अलावा राजस्थान के समग्र आदिवासी समाज की महिलाओं में भी इस बीमारी का प्रतिशत 61.6 दर्ज किया गया है, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डूंगरपुर जिले में गंभीर एनीमिया से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं की भयावह स्थिति
सांसद राजकुमार रोत को दिए गए सरकारी जवाब के मुताबिक अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच के आंकड़ों में डूंगरपुर जिले में कुल 34,304 गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच की गई, जिनमें से 3,152 महिलाएं गंभीर रूप से एनीमिया की चपेट में पाई गईं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसी समयावधि के दौरान जिला चिकित्सालय द्वारा जारी कुल 5,390 यूनिट रक्त में से 1,662 यूनिट रक्त अकेले गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती माताओं को चढ़ाना पड़ा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति आदिवासी अंचलों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोर होती बुनियादी व्यवस्था को दर्शाती है।
सांसद राजकुमार रोत ने सरकारी योजनाओं और अभियानों के क्रियान्वयन पर उठाए सवाल
इस गंभीर मुद्दे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि जब आधिकारिक आंकड़े खुद यह बयां कर रहे हैं कि आदिवासी महिलाओं में एनीमिया महामारी का रूप ले चुका है, तब केवल कागजी योजनाओं और अभियानों के नाम गिना देने मात्र से इस विकट समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से एनीमिया मुक्त भारत अभियान, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान और जननी सुरक्षा योजना जैसी तमाम योजनाओं के नाम पर भारी-भरकम बजट खर्च किया जा रहा है, फिर भी यदि धरातल पर हजारों गर्भवती महिलाएं गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझ रही हैं तो यह प्रशासनिक नीतियों की विफलता को स्पष्ट रूप से उजागर करता है।
आदिवासी बहुल जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना और मिशन शुरू करने की पुरजोर मांग
स्थिति की नजाकत को देखते हुए सांसद राजकुमार रोत ने केंद्र सरकार से मांग की है कि देश के सभी आदिवासी बहुल जिलों में मातृ स्वास्थ्य और पोषण सुधार के लिए एक विशेष मिशन की शुरुआत की जाए। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर पर सुदृढ़ करने, आयरन व पोषण से जुड़े कार्यक्रमों की स्वतंत्र एजेंसियों से नियमित निगरानी करवाने तथा इस स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए एक समयबद्ध कार्ययोजना लागू करने पर जोर दिया है। इस संबंध में स्वास्थ्य से जुड़ी विस्तृत शासकीय गाइडलाइन्स और अपडेट्स देखने के लिए नागरिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल का अवलोकन कर सकते हैं।


