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    हरीश चौधरी का गहलोत पर तीखा वार, बोले- इस पवित्र स्थान पर उनका नाम लेना उचित नहीं

    बाड़मेर। राजस्थान की सियासत में उस समय एक नया भूचाल आ गया जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक हरीश चौधरी ने एक धार्मिक मंच से अपनी ही पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर परोक्ष रूप से तीखा हमला बोल दिया। तिलक नगर में नवनिर्मित तेजाजी महाराज मंदिर के भव्य प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान आयोजित जनसभा में उन्होंने कहा कि इस पावन स्थल पर पूर्व मुख्यमंत्री के विषय में कुछ न बोलना ही श्रेयस्कर होगा। कांग्रेस के आंतरिक मतभेदों और अंतर्कलह को उजागर करने वाला यह बयान सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों में इस समय सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है, जिससे यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

    धार्मिक मंच से सियासी तंज और संवादहीनता का दर्द

    बुधवार को आयोजित इस धार्मिक समागम में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मध्य प्रदेश प्रभारी व बायतू विधायक हरीश चौधरी के अलावा राज्य सरकार के मंत्री के.के. विश्नोई, सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल और पोकरण के विधायक महंत प्रतापपुरी भी मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान जब सूईयां मेले के लिए विशेष घाट निर्माण हेतु 5 से 6 करोड़ रुपये के बजटीय सहयोग की बात उठी, तब हरीश चौधरी ने वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और मंत्री विश्नोई के आपसी तालमेल की तारीफ करते हुए पूर्व सीएम पर तंज कसा। उन्होंने दर्द साझा करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के बाद से पूर्व मुख्यमंत्री के साथ उनकी सामान्य बोलचाल और औपचारिकता (रामा-श्यामा) भी पूरी तरह बंद हो चुकी है, और अब उन्हें वहां की राजनीतिक हलचल की खबरें सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल के जरिए प्राप्त होती हैं।

    नेताओं की घर वापसी और पूर्व में रही नाराजगी

    यह पहला अवसर नहीं है जब हरीश चौधरी ने मारवाड़ की राजनीति को लेकर अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ मुखर रुख अपनाया हो। इससे पहले बाड़मेर के दो कद्दावर नेताओं, मेवाराम जैन और आमीन खान की कांग्रेस संगठन में दोबारा एंट्री कराए जाने के फैसले पर भी उन्होंने आलाकमान के समक्ष खुलकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया था। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इन दोनों विवादित नेताओं की पार्टी में ससम्मान वापसी के सूत्रधार पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ही थे, जिसके चलते हरीश चौधरी की नाराजगी उनके प्रति और ज्यादा बढ़ गई थी। इस नए बयान ने दोनों गुटों के बीच जमी बर्फ और कड़वाहट को एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर लाकर खड़ा कर दिया है।

    विकास कार्यों के आश्वासन के बीच शुरू हुआ विवाद

    इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि तेजाजी महाराज मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान तैयार हुई, जहां डूंगरपुरी मठ के मठाधीश ने क्षेत्र के ऐतिहासिक अर्धकुंभ माने जाने वाले सूईयां मेले के लिए श्रद्धालुओं हेतु पक्के घाट और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए करोड़ों रुपये की सरकारी सहायता की मांग रखी थी। इस मांग पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए प्रदेश सरकार के मंत्री के.के. विश्नोई ने मंच से आश्वासन दिया कि सभी स्थानीय जनप्रतिनिधि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस जनहित के कार्य को पूरा कराने का सामूहिक प्रयास करेंगे। इसी चर्चा के दौरान जब पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल की बात आई, तो हरीश चौधरी खुद को रोक नहीं पाए और उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री को लेकर यह बड़ा बयान दे डाला, जिसने राजस्थान कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को दोबारा हवा दे दी है।

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