इंदौर: देश के बहुचर्चित ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) की दहलीज पर पहुंच गया है। मेघालय सरकार ने उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर कर इस सनसनीखेज मामले की मुख्य आरोपी और मृतक की पत्नी सोनम रघुवंशी की जमानत को तुरंत रद्द करने की मांग की है। देश की सबसे बड़ी अदालत इस गंभीर मामले पर शुक्रवार (3 जुलाई) को सुनवाई करने के लिए तैयार हो गई है।
पति को इंदौर से मेघालय ले जाकर दी थी बेरहम मौत
शीर्ष अदालत में मेघालय सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल ने इस जघन्य हत्याकांड के खौफनाक घटनाक्रम को सामने रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि आरोपी महिला सोनम रघुवंशी सोची-समझी साजिश के तहत अपने पति राजा रघुवंशी को मध्य प्रदेश के इंदौर से बहला-फुसलाकर मेघालय लेकर गई थी। वहाँ उसने अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर बेहद बेरहमी से पति की हत्या कर दी और अपराध को छिपाने के उद्देश्य से शव को सुनसान इलाके में ठिकाने लगा दिया था।
हाई कोर्ट से मिली थी राहत, सरकार ने दी चुनौती
कानूनी उतार-चढ़ाव: इंदौर के प्रतिष्ठित कारोबारी राजा रघुवंशी की निर्मम हत्या के करीब एक साल बाद, मुख्य आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को 27 अप्रैल 2026 को निचली अदालत से जमानत मिल गई थी। मेघालय सरकार ने निचली अदालत के इस फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि, बीते 29 जून को हाई कोर्ट ने सरकार की उस पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट से झटका लगने के बाद अब राज्य सरकार ने सोनम को दोबारा सलाखों के पीछे भेजने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
पुलिस की एक तकनीकी चूक के कारण जेल से बाहर आई आरोपी
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई थी कि पुलिस ने सोनम को गिरफ्तार करते समय संवैधानिक नियमों का पालन नहीं किया था। न्यायालय ने माना था कि गिरफ्तारी के वक्त आरोपी को उसकी कस्टडी का ठोस आधार न बताना संविधान के अनुच्छेद 22(1) का स्पष्ट उल्लंघन है। कानूनन, किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को अपने जुर्म और गिरफ्तारी की वजह जानने तथा अपनी पसंद का कानूनी सलाहकार (वकील) चुनने का पूरा अधिकार है। पुलिस की इसी तकनीकी लापरवाही को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने उसे जमानत दे दी थी।
पीड़ित परिवार ने जताई थी गहरी निराशा
सोनम रघुवंशी को जेल से रिहाई मिलने पर मृतक राजा रघुवंशी के दुखी परिवार ने गहरा शोक और न्याय व्यवस्था पर निराशा व्यक्त की थी। परिजनों का कहना है कि इतने जघन्य अपराध की मुख्य सूत्रधार का तकनीकी कारणों से बाहर आना समाज और न्याय के लिए ठीक नहीं है। अब परिजनों के साथ-साथ पूरे प्रदेश की नजरें 3 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली इस बड़ी सुनवाई पर टिकी हुई हैं।


