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    राजस्थान में प्री-मानसून की झमाझम बारिश, पिछले 5 साल से लगातार सामान्य से अधिक वर्षा का रिकॉर्ड

    जयपुर |  राजस्थान में इस साल प्री-मानसून के दौर ने बेहद दमदार दस्तक दी है। जून की शुरुआत होते ही राज्य के विभिन्न हिस्सों में झमाझम बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है, जिससे झुलसाती गर्मी से परेशान आम जनता को बड़ी राहत मिली है। मौसम केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते कुछ दिनों में बांसवाड़ा, बूंदी, भीलवाड़ा, अजमेर और भरतपुर जैसे जिलों में अच्छी वर्षा हुई है। इसके साथ ही बीकानेर, चूरू और हनुमानगढ़ के इलाकों में ओले भी गिरे हैं। इस मौसमी बदलाव और तेज हवाओं के चलते कई शहरों के पारे में 5 डिग्री सेल्सियस तक की कमी देखी गई है।

    मानसून के आगमन का बदलता मिजाज

    आमतौर पर राजस्थान में मानसूनी हवाओं के पहुंचने का सामान्य समय 25 जून माना जाता है, लेकिन बीते पांच सालों के आंकड़े बताते हैं कि इसके आगमन की तारीखों में काफी उतार-चढ़ाव आया है। साल 2021 और 2025 में मानसून समय से पहले यानी 18 जून को ही आ गया था, जबकि साल 2022 में इसने काफी इंतजार कराया और 30 जून को प्रवेश किया। वहीं साल 2023 और 2024 के दौरान मानसून ने अपने तय समय यानी 25 जून को ही प्रदेश में दस्तक दी थी।

    बारिश के आंकड़ों में भारी उछाल

    पिछले कुछ वर्षों में राज्य में होने वाली वर्षा के आंकड़ों में भी बड़ा बदलाव आया है। वर्ष 2022 में राजस्थान में सामान्य से 37 फीसदी ज्यादा यानी 596.1 मिमी बारिश हुई थी। इसके बाद 2024 में यह आंकड़ा और बढ़ा तथा सामान्य से 56 प्रतिशत अधिक 678.4 मिमी दर्ज किया गया। वहीं, साल 2025 में तो रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई, जहां 715.9 मिमी वर्षा के साथ राज्य ने पिछले 124 सालों के इतिहास का दूसरा सबसे अधिक वर्षा वाला मानसून देखा। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में बादलों के अत्यधिक बरसने और बाढ़ जैसी स्थितियों से यह साफ है कि प्रदेश का मानसून अब पहले से कहीं अधिक आक्रामक, अनिश्चित और तीव्र होता जा रहा है।

    आगामी दिनों के लिए मौसम का पूर्वानुमान

    फिलहाल मौसम विभाग ने शनिवार को राज्य के 25 जिलों में धूलभरी आंधी चलने और बारिश होने की चेतावनी जारी की है। हालांकि, यह राहत ज्यादा दिनों तक टिकने वाली नहीं है, क्योंकि 8 जून के बाद पश्चिमी राजस्थान के जिलों में एक बार फिर धूप के तेवर कड़े होने की उम्मीद है। इस दौरान कुछ मैदानी इलाकों में लू (हीटवेव) का प्रकोप दोबारा शुरू हो सकता है। ऐसे में प्री-मानसून की इस फुहारों के बीच अब हर किसी की नजरें मुख्य मानसून के आने पर टिकी हुई हैं।

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