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    अफगानिस्तान में भारी बारिश और बाढ़ से भारी तबाही, अब तक12 की मौत

    काबुल। युद्ध और आर्थिक संकट से जूझ रहे अफगानिस्तान के लिए नई मुसीबत कुदरत के कहर के रूप में सामने आई है। देश के विभिन्न हिस्सों में पिछले तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश और भारी बर्फबारी ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण कई प्रांतों में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक कम से कम 12 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, इस आपदा में 11 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जबकि कई अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
    बाढ़ का सबसे भीषण प्रभाव कपिसा, परवान, कंधार, हेलमंद, हेरात और बदख्शां समेत कई प्रमुख प्रांतों में देखा गया है। मूसलाधार बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं और बाढ़ का पानी रिहाइशी इलाकों में घुस गया है। रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 1,859 घर पूरी तरह या आंशिक रूप से ढह गए हैं, जिससे हजारों परिवार कड़कड़ाती ठंड में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुँचा है; करीब 209 किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कें पानी में बह गई हैं, जिससे प्रभावित इलाकों का संपर्क मुख्य शहरों से कट गया है। बिजली गुल है और स्वच्छ पेयजल के साथ-साथ खाद्य सामग्री की आपूर्ति भी ठप हो गई है।
    कृषि और पशुपालन पर आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी इस बाढ़ ने करारा झटका दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 13,941 एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जिससे तैयार फसलें बर्बाद हो गई हैं। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन रहे करीब 1,200 पशुओं की भी इस आपदा में मौत हो गई है। आपदा प्रबंधन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं, लेकिन खराब मौसम और कटे हुए रास्तों के कारण सहायता पहुँचाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।अफगानिस्तान में मानवीय स्थिति पहले से ही बेहद नाजुक बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2026 में देश की लगभग 2.19 करोड़ आबादी को मानवीय सहायता की तत्काल आवश्यकता होगी। जलवायु परिवर्तन के कारण बार-बार आने वाले सूखे, भूकंप और अब इस भीषण बाढ़ ने हालात को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। साथ ही, पड़ोसी देशों से लौट रहे लाखों शरणार्थियों के कारण स्थानीय संसाधनों और बुनियादी सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है। हालांकि मानवीय साझेदार भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और आश्रय के लिए करोड़ों डॉलर की सहायता योजना पर काम कर रहे हैं, लेकिन वर्तमान आपदा ने इन प्रयासों के सामने एक नई और बड़ी चुनौती पेश कर दी है। आने वाले दिनों में यदि मौसम नहीं सुधरा, तो संकट और अधिक गहरा सकता है।

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