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    केस डायरी पेश न करने पर हाई कोर्ट सख्त, एसपी को तलब करने की चेतावनी

    ग्वालियर|मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य पक्ष की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है. कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि अगली सुनवाई तक केस डायरी प्रस्तुत नहीं की गई तो ग्वालियर के पुलिस अधीक्षक (SP) को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए तलब किया जा सकता है|

    मामले की सुनवाई और कोर्ट की सख्ती

    यह मामला हृदेश कुशवाह सहित अन्य आरोपियों और ग्वालियर पुलिस से संबंधित है, जिसकी सुनवाई जस्टिस अमित सेठ की एकलपीठ में हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि कई बार अवसर दिए जाने के बावजूद केस डायरी पेश न करना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता|

    बार-बार समय मांगने पर आपत्ति

    सुनवाई के दौरान राज्य पक्ष के अधिवक्ता ने एक बार फिर केस डायरी पेश करने के लिए समय मांगा, जिसका आवेदक पक्ष ने विरोध किया. उनका कहना था कि यह स्थानीय मामला है और पहले भी 10 मार्च और 18 मार्च को समय दिया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद संबंधित दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत नहीं किए गए|

    ड्रग्स मामले में चौंकाने वाला खुलासा

    दरअसल, पूरा मामला वर्ष 2022 में मुरार थाना क्षेत्र में हुई एक कार्रवाई से जुड़ा है, जिसमें पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार कर उनके पास से 720 ग्राम MDMA ड्रग्स बरामद करने का दावा किया था. हालांकि, जब जब्त किए गए पदार्थ की जांच कराई गई तो रिपोर्ट में सामने आया कि वह मादक पदार्थ नहीं बल्कि यूरिया था. इस खुलासे के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया और अदालत ने आरोपियों को जमानत दे दी, साथ ही जांच में लापरवाही मानते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए.

    जिला अदालत से हाई कोर्ट तक मामला

    इसके बाद आरोपियों ने जिला अदालत में मामले को समाप्त करने की मांग की, लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई. इसी फैसले को चुनौती देते हुए उन्होंने हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की है. अब इस याचिका की सुनवाई के दौरान केस डायरी पेश न किए जाने पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य पक्ष को अंतिम मौका दिया है. मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को निर्धारित की गई है, जहां हर हाल में केस डायरी पेश करना अनिवार्य होगा|

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