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    ऑक्सीटोसिन पर हाईकोर्ट सख्त, स्वास्थ्य विभाग के पीएस और ग्वालियर कलेक्टर को नोटिस

    ग्वालियर: बाजार में मिलने वाली सब्जियों में कीटनाशकों का उपयोग आम बात है लेकिन कई विक्रेता अपनी सब्जी को बड़ा करने या पकाने के लिए इंजेक्शन का उपयोग करते हैं. ये इंजेक्शन है ऑक्सीटोसिन. 12 साल पहले हाईकोर्ट के आदेश पर यह इंजेक्शन प्रतिबंधित हो चुका है. इस संबंध में ग्वालियर हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई गई है जिसको लेकर अब ग्वालियर कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को उच्च न्यायालय ने नोटिस जारी किया है.

    खुलेआम हो रहा खतरनाक इंजेक्शन का उपयोग

    हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के संबंध में बीपी सिंह राजावत ने एक अवमानना याचिका दायर की थी. जिसमें बताया गया है कि ग्वालियर की सब्जी मंडियों में तरबूज, लौकी जैसे फल और सब्जियां ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाकर बढ़ाकर धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं, जो कि किसी के भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. इस संबंध में हाईकोर्ट ने ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन पर प्रतिबंध भी लगाया था लेकिन उस आदेश के बावजूद आज भी इसका उपयोग जारी है और बाजार में यह खुलेआम बिक रहा है.

    'न्यायालय के आदेश का उल्लंघन, बिक्री उपयोग जारी'

    याचिकाकर्ता के वकील एडवोकेट अवधेश सिंह तोमर के मुताबिक इस याचिका पर ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ सुनवाई कर रही है. सुनवाई के दौरान उन्होंने कोर्ट के सामने स्पष्ट तौर पर बात रखते हुए कहा कि, "लौकी, आलू तरबूज समेत कई सब्जियों को बड़ा करने के लिए खतरनाक ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का उपयोग बदस्तूर जारी है. ना सिर्फ फल सब्जी बल्कि पॉलिट्रीफार्मों में भी चिक्स को बड़ा करने के लिए इस प्रतिबंधात्मक इंजेक्शन का उपयोग किया जा रहा है. यहां तक की यह इंजेक्शन खुलेआम बिक रहा है जिसे कोई भी खरीद सकता है. यह सब उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद हो रहा है जो कि उस आदेश का उल्लंघन है."

     

     

      हाईकोर्ट ने पीएस और कलेक्टर को दिया नोटिस

      सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए इसे न्यायालय के आदेश का उल्लंघन माना है. हाईकोर्ट ने इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव संजीव यादव और ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान को नोटिस जारी करते हुए सवाल किया है कि, 6 सितंबर 2013 को दिए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन पर बिक्री और पूर्ण प्रतिबंध के आदेश के बावजूद इस खतरनाक इंजेक्शन पर रोक क्यों नहीं लग पाई है. इसे लेकर दोनों अधिकारियों से हाईकोर्ट ने जवाब तलब किया है.

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