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    56 लोगों की जान लेने वाले अहमदाबाद ब्लास्ट केस में हाई कोर्ट का अहम फैसला

    अहमदाबाद। गुजरात उच्च न्यायालय ने लगभग 18 वर्ष पुराने अहमदाबाद श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोट मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने विशेष कोर्ट द्वारा पूर्व में दोषी ठहराए गए 38 आतंकवादियों को दी गई मृत्युदंड (फांसी) की सजा को पूरी तरह बरकरार रखा है। इसके साथ ही, मामले में 11 अन्य दोषियों को मिली उम्रकैद की सजा भी यथावत जारी रहेगी। न्यायमूर्ति एवाई कोगजे और न्यायमूर्ति समीर दवे की खंडपीठ ने विशेष अदालत के निर्णय के विरुद्ध दोषियों द्वारा दायर की गईं सभी पुनरीक्षण अपीलों को सिरे से खारिज कर दिया और प्रतिबंधित संगठन 'इंडियन मुजाहिदीन' के इन सदस्यों की सजा पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी।

    70 मिनट में दहला था शहर, विशेष अदालत ने 14 साल बाद सुनाया था फैसला

    इस खौफनाक आतंकी साजिश को 26 जुलाई 2008 को अंजाम दिया गया था, जब महज 70 मिनट के भीतर शहर के विभिन्न व्यस्त इलाकों में एक के बाद एक 21 धमाके हुए थे। इन विस्फोटों में 56 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी और 200 से अधिक लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए थे। इस पूरे मामले में कुल 78 लोगों को आरोपी बनाया गया था और विभिन्न थानों में 35 अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। कानूनी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के लिए एक विशेष अदालत का गठन किया गया था, जिसने करीब 14 साल तक चली लंबी सुनवाई के बाद फरवरी 2022 में 38 दोषियों को फांसी और 11 को आजीवन कारावास का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था, जिसकी अब उच्च न्यायालय ने भी पुष्टि कर दी है।

    बसों, बाजारों और अस्पतालों को बनाया गया था निशाना

    अन्वेषण एजेंसियों के मुताबिक, देश को झकझोर देने वाले इस हमले में आतंकियों ने बेहद क्रूर रणनीति अपनाई थी। विस्फोटकों को टिफिन बॉक्स में छिपाकर उन सार्वजनिक बसों, बाजारों और अस्पतालों के बाहर खड़ी साइकिलों पर रखा गया था, जहां अमूमन भारी भीड़ जुटती है। विशेष रूप से अस्पतालों को इसलिए निशाना बनाया गया था ताकि शुरुआती धमाकों के घायलों को जब वहां लाया जाए, तो वहां होने वाले दूसरे विस्फोट से और अधिक तबाही मचाई जा सके। जांच रिपोर्टों में यह बात भी सामने आई थी कि इन आत्मघाती धमाकों की साजिश वर्ष 2002 के गुजरात दंगों का प्रतिशोध लेने के उद्देश्य से रची गई थी।

    उच्च न्यायालय का पीड़ितों को बड़ा मुआवजा देने का आदेश

    सजा बरकरार रखने के साथ-साथ उच्च न्यायालय ने इस त्रासदी का दंश झेल रहे पीड़ितों और उनके परिवारों के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए बड़े मुआवजे की घोषणा की है। अदालत के आदेशानुसार, हमले में मारे गए सभी 56 मृतकों के आश्रित परिवारों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, इस भयावह आतंकी घटना में घायल हुए 200 से अधिक लोगों को भी राहत के तौर पर 1-1 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाएगा। अदालत के इस सख्त रुख के बाद वर्षों पुराने इस सबसे बड़े कानूनी मामले के फैसलों पर उच्च स्तरीय विधिक मुहर लग गई है।

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