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    पूजा घर में कितनी मूर्तियां रखनी चाहिए? मूर्तियों का आकार कितना हो, जानें क्या कहता है ज्योतिष और वास्तु शास्त्र

    लगभग हर घर में पूजा का एक विशेष स्थान होता है, जहां देवी-देवताओं की आराधना की जाती है. लेकिन कई बार लोग श्रद्धावश पूजा घर में बहुत अधिक मूर्तियां या बड़े आकार की प्रतिमाएं स्थापित कर लेते हैं. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार, पूजा घर में मूर्तियों की संख्या और उनका आकार भी विशेष महत्व रखता है. बहुत से लोगों को जानकारी ना होने की वजह से कितनी भी मूर्तियां रख लेते हैं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का सही से बैलेंस नहीं बन पाता. माना जाता है कि पूजा घर में सही नियमों का पालन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पूजा का फल भी शुभ माना जाता है.

    पूजा घर में कितनी मूर्तियां रखना उचित माना गया है?
    ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूजा घर में देवी-देवताओं की अत्यधिक मूर्तियां रखने के बजाय सीमित संख्या में प्रतिमाएं रखना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि एक ही देवता की कई मूर्तियां या कई शिवलिंग, कई गणेश प्रतिमाएं अथवा एक से अधिक शंख रखने से बचना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि प्रत्येक प्रतिमा की नियमित पूजा और सेवा का विधान बताया गया है. अगर किसी कारणवश पुरानी मूर्तियां खंडित हो जाएं या पूजा योग्य ना रहें, तो उन्हें घर में रखने के बजाय धार्मिक परंपरा के अनुसार किसी पवित्र नदी या मंदिर में उचित विधि से विसर्जित या समर्पित करना बेहतर माना जाता है.
    मूर्तियों का आकार कितना होना चाहिए?
    वास्तु शास्त्र में पूजा घर के लिए छोटी और संतुलित आकार की मूर्तियां अधिक उपयुक्त मानी गई हैं. सामान्यतः 3 से 9 इंच तक की प्रतिमाएं गृह पूजा के लिए शुभ मानी जाती हैं. वहीं बड़े आकार की मूर्तियां मंदिरों या सार्वजनिक पूजा स्थलों के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती हैं. मान्यता है कि बहुत बड़ी मूर्तियों की पूजा के लिए विशेष नियम और नित्य सेवा का पालन आवश्यक होता है. इसलिए सामान्य गृहस्थ जीवन में छोटे आकार की प्रतिमाएं रखना सुविधाजनक और शुभ माना जाता है. पूजा घर में हमेशा एक छोटा और ठोस शिवलिंग ही रखना चाहिए, जिसका आकार अंगूठे के पोर से बड़ा ना हो.
    किन बातों का रखें विशेष ध्यान?
    वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा घर में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए—

        पूजा घर हमेशा साफ और व्यवस्थित रखें.
        खंडित या टूटी हुई मूर्तियां पूजा स्थान में ना रखें.
        देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को आमने-सामने रखने से बचें.
        पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करना शुभ माना जाता है.
        पूजा घर में अनावश्यक तस्वीरें, खराब दीपक या अनुपयोगी धार्मिक सामग्री जमा ना होने दें.

    ज्योतिष क्या मानता है?
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पूजा घर में सादगी, नियमित पूजा और श्रद्धा सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं. केवल अधिक मूर्तियां रखने से शुभ फल नहीं मिलता, बल्कि श्रद्धा, नियम और सकारात्मक भाव से की गई आराधना को अधिक फलदायी माना गया है. इसलिए पूजा स्थान को शांत, स्वच्छ और सात्विक बनाए रखना आवश्यक माना जाता है.

     

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