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    गुरु पूर्णिमा पर सांदीपनि आश्रम में भक्तों की भारी भीड़, CM मोहन यादव भी पहुंचेंगे

    उज्जैन। धर्मनगरी उज्जैन में गुरुपूर्णिमा का पर्व पूरे उत्साह और अगाध आस्था के साथ मनाया जा रहा है। मंगलनाथ मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध सांदीपनि आश्रम में तड़के मंदिर के पट खुलते ही श्रद्धालुओं के दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग भगवान श्रीकृष्ण और गुरु सांदीपनि मुनि के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे पूरा आश्रम परिसर भजन और मंत्रोच्चार से भक्तिमय बना हुआ है। इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव के भी दर्शन के लिए पहुंचने की संभावना है।

    विशेष पूजा, अभिषेक और हवन का आयोजन

    आश्रम में दिन की शुरुआत विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुई। पुजारियों ने शिप्रा, गंगा और गोमती नदी के पवित्र जल से भगवान श्रीकृष्ण और गुरु सांदीपनि मुनि का अभिषेक किया। इसके बाद पंचामृत पूजन, नए वस्त्र अर्पित करने की परंपरा और फूलों से मनमोहक श्रृंगार किया गया। महाआरती के उपरांत श्रद्धालुओं को प्रसाद बांटा गया तथा विश्व शांति और जन-कल्याण की कामना के साथ विशेष हवन का भी आयोजन हुआ। प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने और सुचारु दर्शन व्यवस्था के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं।

    श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली का महत्व

    उज्जैन का सांदीपनि आश्रम भारतीय संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण, उनके भाई बलराम और मित्र सुदामा ने यहीं गुरु सांदीपनि मुनि से वेद, शास्त्र और युद्धकला की शिक्षा प्राप्त की थी। गुरुपूर्णिमा के अवसर पर मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। इस आयोजन से शहर के होटल, धर्मशालाओं और स्थानीय बाजारों में भारी चहल-पहल देखी जा रही है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिली है।

    विद्यारंभ संस्कार की विशेष परंपरा

    गुरुपूर्णिमा के दिन सांदीपनि आश्रम में बच्चों के विद्यारंभ संस्कार का विशेष महत्व माना जाता है। बड़ी संख्या में अभिभावक अपने छोटे बच्चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराने के लिए यहां लाते हैं। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने भी इसी स्थल से "श्री गणेशाय नमः", "श्री सरस्वत्यै नमः" और "श्री गुरुवे नमः" लिखकर अपनी शिक्षा की शुरुआत की थी। इसी सनातन परंपरा का पालन करते हुए आज भी हजारों परिवार अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और बेहतर संस्कारों के लिए गुरुपूर्णिमा पर यहां शिक्षा का शुभारंभ कराते हैं।

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