नई दिल्ली: पूर्व सांसद और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन कुमार का निधन हो गया है। तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें तुरंत दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने जाँच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल से जुड़े सूत्रों के अनुसार, उन्हें मृत अवस्था में ही अस्पताल लाया गया था। हालांकि, उनके निधन के सटीक चिकित्सीय कारणों की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है और विस्तृत विवरण की प्रतीक्षा की जा रही है।
राजनीतिक सफर और सिख विरोधी दंगे
सज्जन कुमार देश के एक जाने-माने राजनेता थे और उन्होंने लोकसभा सदस्य के रूप में लंबे समय तक अपनी सेवाएँ दी थीं। उनके राजनीतिक जीवन के साथ 1984 के सिख विरोधी दंगों का विवाद भी लगातार जुड़ा रहा। दंगों के दौरान दिल्ली के सुल्तानपुरी, दिल्ली कैंट और पालम कॉलोनी जैसे क्षेत्रों में हिंसक भीड़ को भड़काने के गंभीर आरोप उन पर लगे थे। पीड़ितों और गवाहों के बयानों के अनुसार, 1 नवंबर 1984 को उन्होंने भीड़ को संबोधित करते हुए हिंसा फैलाने के लिए उकसाया था। उन पर यह भी आरोप थे कि उनके समर्थकों ने मतदाता सूची के माध्यम से सिखों के आवासों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की पहचान कर उन्हें निशाना बनाया था।
प्रमुख घटनाएँ और अदालती मामले
1984 के दंगों से जुड़े कई मामलों में उनका नाम सामने आया, जिनमें दिल्ली कैंट का राजनगर क्षेत्र प्रमुख था। इस स्थान पर भड़की हिंसा में पाँच सिखों की हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा, पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) और अन्य निकायों की जाँच रिपोर्टों में भी सुल्तानपुरी क्षेत्र में भीड़ को भड़काने के संदर्भ में कांग्रेस नेता के रूप में उनकी पहचान की गई थी। कानूनी प्रक्रिया के दौरान, वर्ष 2002 और 2013 में निचली अदालतों द्वारा उन्हें कुछ मामलों में बरी किया गया था, जिसके खिलाफ पीड़ित पक्ष और सीबीआई ने उच्च अदालत का रुख किया था।
उम्रकैद की सजा
मामले की पुनर्सुनवाई और गवाहों के बयानों के आधार पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें 1984 के दंगों से जुड़े आपराधिक षड्यंत्र और हिंसा भड़काने के मामले में दोषी ठहराया। इसके बाद अदालत ने उन्हें उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई थी। सरस्वती विहार क्षेत्र में हुई आगजनी और दो सिखों की हत्या से जुड़े मामले में भी अभियोजन पक्ष ने उनके खिलाफ उकसावे और लूटपाट कराने के ठोस प्रमाण प्रस्तुत किए थे। उनके अचानक हुए निधन की खबर से राजनीतिक गलियारों में हलचल है, और मौत के वास्तविक कारणों का पता चलने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।


