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    दिल्ली में आदिवासी नेताओं के साथ बैठक में राहुल बोले-आदिवासी नेतृत्व तैयार करें

    भोपाल। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 5 राज्यों के आदिवासी नेताओं के साथ बैठक की। इनमें आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया, सीईसी मेंबर ओंकार सिंह मरकाम, आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम, विधायक सुनील उईके, खरगोन के लोकसभा प्रत्याशी रहे पोरलाल खर्ते, धार के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी राधेश्याम मुवेल मौजूद थे। 10 जनपथ, नई दिल्ली में अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस द्वारा आयोजित बैठक में राहुल गांधी ने आदिवासी नेताओं के साथ संवाद के दौरान कहा- आदिवासी भारत के पहले मालिक हैं। उनकी पीड़ा, समस्याओं और संघर्षों को समझ कर, उनके जल, जंगल, जमीन और अधिकारों पर हो रहे हमलों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए हमेशा समर्पित हूं।
    बैठक में राहुल गांधी ने कहा कि आदिवासी वर्ग में नेतृत्व तैयार करने का काम करें। जो आदिवासी युवा अपने क्षेत्र में सक्रिय हैं। सामाजिक रूप से जो मुखर होकर आदिवासी समुदाय के मुद्दे उठाते हैं। उन्हें कांग्रेस पार्टी से जोडऩे का प्रयास करना चाहिए। आदिवासी वर्ग के पढ़े-लिखे युवाओं को भी पार्टी से जोडऩे पर काम करें। आदिवासी वर्ग में नया नेतृत्व तैयार करने के लिए सबको मिलकर प्रयास करना चाहिए।
    आदिवासी कांग्रेस को महत्व मिले
    बैठक में शामिल हुए धार के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी राधेश्याम मुवेल ने राहुल गांधी से कहा कि विभिन्न सामाजिक संगठन अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हैं। हम उनके दबाव में कुछ लोगों को चुनाव में टिकट दे देते हैं। सामाजिक संगठनों के लोग पार्टी पर टिकट देने का दबाव बनाने लगते हैं। इससे पार्टी के साथ संघर्ष करने वाले कार्यकर्ता निराश होते हैं। हमें सामाजिक संगठनों के बजाय आदिवासी कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं को चुनाव में प्राथमिकता देना चाहिए। मुवेल ने आगे कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय और प्रदेश अध्यक्ष के सुझावों को टिकट वितरण में महत्व मिलना चाहिए। इससे आदिवासी कांग्रेस मजबूत होगी और पार्टी को फायदा मिलेगा।

    आदिवासियों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहिए
    बैठक में राहुल गांधी ने कहा कि विस्थापन, पेसा कानून के क्रियान्वयन में गड़बड़ी, वनाधिकार जैसे आदिवासियों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहिए। राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, गुजरात और राजस्थान के आदिवासी नेताओं से अपने-अपने राज्य के आदिवासियों की मुख्य समस्याओं और उनके समाधान को लेकर भी सुझाव मांगे। बैठक में पूर्व मंत्री और सीईसी मेंबर ओंकार सिंह मरकाम ने कहा कि मैं जब जनजातीय कार्य मंत्री था। उस दौरान मप्र में आदिवासी वर्ग को सबसे ज्यादा वनाधिकार के पट्टे दिए गए थे। अब बीजेपी की सरकार में आदिवासियों के पट्टे निरस्त किए जा रहे हैं।

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