ब्रासीलिया। ब्राजील में पिछले वर्ष संचालित किए गए व्यापक पुलिस 'ऑपरेशन कंटेनमेंट' पर मानवाधिकार संगठनों ने सवाल खड़े करते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है। इस कार्रवाई में 117 संदिग्ध अपराधियों और 5 पुलिसकर्मियों समेत कुल 122 लोगों की जान चली गई थी। 'ह्यूमन राइट्स वॉच' (एचआरडब्ल्यू) ने इस अभियान को कत्लेआम करार देते हुए सुरक्षा बलों की कार्यशैली पर गंभीर आशंका व्यक्त की है। यह ऑपरेशन 28 अक्टूबर को रियो डी जेनेरियो की कॉम्प्लेक्सो डो अलेमाओ और कॉम्प्लेक्सो दा पेन्हा की घनी बस्तियों में चलाया गया था, जिसमें कुख्यात ड्रग कार्टेल 'कमांडो वर्मेल्हो' के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए लगभग 2,500 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
बॉडी कैमरों और नियमों के उल्लंघन के आरोप
मानवाधिकार संगठन का आरोप है कि इस कार्रवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों की अनदेखी की गई। अभियान में शामिल पुलिसकर्मियों ने अनिवार्य बॉडी कैमरे नहीं पहने थे, और कुछ कैमरों के साथ छेड़छाड़ की बात भी सामने आई है, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता संदेहास्पद हो गई है। संगठन के स्थानीय नेतृत्व ने इस प्रशासनिक लापरवाही पर गहरी चिंता जाहिर की है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से उठे मुठभेड़ पर सवाल
पोस्टमार्टम रिपोर्टों के तकनीकी विश्लेषण ने एनकाउंटर के दावे पर गंभीर सवाल पैदा कर दिए हैं। आंकड़ों के अनुसार, मृतकों में से लगभग 40 प्रतिशत लोगों के सिर में और 75 प्रतिशत के पीठ में गोली लगी थी। इन साक्ष्यों के आधार पर यह अंदेशा जताया जा रहा है कि संदिग्धों को हिरासत में लेने के बाद करीब से गोली मारी गई, न कि वे प्रत्यक्ष आमने-सामने की मुठभेड़ में मारे गए।
नया एंटी-गैंग कानून और जेलों पर बढ़ता दबाव
यह बड़ी कार्रवाई मार्च 2026 में ब्राजील में लागू हुए नए एंटी-गैंग कानून के बाद देखने को मिली है, जिसका उद्देश्य बड़े आपराधिक गिरोहों और मिलिशिया नेटवर्क को कमजोर करना है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों ने इसके संवैधानिक पहलुओं और अत्यधिक सख्त प्रावधानों पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का तर्क है कि बिना सुनवाई लंबी हिरासत और पैरोल पर रोक से ब्राजील की जेलों में भीड़ और बढ़ेगी। साथ ही, अपराधियों के आश्रितों की वित्तीय सहायता बंद होने से निर्दोष परिजनों पर आर्थिक संकट मंडराने का खतरा है।



