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    अयोध्या चढ़ावा चोरी कांड में नए आरोपियों की एंट्री तय, सबूत खंगाल रही पुलिस

    अयोध्या: राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की राशि में हुई करोड़ों की हेराफेरी के सनसनीखेज खुलासे के 19 दिन बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) की संस्तुति के महज़ दो दिन के भीतर पुलिस ने इस मामले में नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। यह एफआईआर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी अनिल मिश्रा के रिश्तेदार अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा समेत गणना कर्मी मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र और गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव के खिलाफ दर्ज की गई है। इसके अलावा कई अज्ञात लोग भी इस साजिश में शामिल हैं। पुलिस ने मुख्य आरोपी टिन्नू सहित सभी नामजद आरोपियों को हिरासत में ले लिया है।

    बाथरूम में छिपाते थे नोटों की गड्डियां, संगठित गिरोह की तरह 3 साल से चल रहा था खेल

    पुलिसिया जांच में इस बात का बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी इस चोरी को पिछले दो से तीन साल से अंजाम दे रहे थे। चढ़ावे की गिनती के दौरान आरोपी नोटों की गड्डियों को पार कर मंदिर के ही बाथरूम में छिपा देते थे। बाद में मौका पाकर इन पैसों को मंदिर परिसर से बाहर निकाला जाता था और एक तय ठिकाने पर ले जाकर आपस में बांट लिया जाता था। चूंकि इस पूरे कांड को एक संगठित अपराध (Organized Crime) की तरह अंजाम दिया गया है, इसलिए पुलिस ने साफ किया है कि आरोपियों के खिलाफ जल्द ही गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी विवेचना किसी आईपीएस (IPS) या पीपीएस (PPS) स्तर के वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में गठित टीम को सौंपी जा सकती है।

    सरकारी बैंक कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध, बढ़ सकती है आरोपियों की संख्या

    इस मामले में पुलिस को कुछ सरकारी बैंक कर्मचारियों के भी शामिल होने के पुख्ता सबूत मिले हैं। एफआईआर में सरकारी अधिकारियों द्वारा चोरी की धाराओं को भी शामिल किया गया है। पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में जैसे-जैसे सबूत सामने आएंगे, वैसे-वैसे आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है। ट्रस्ट ने शुरुआत में संदिग्धों को पकड़कर जब पूछताछ की थी, तब इनकी निशानदेही पर करीब 3 करोड़ रुपये की नकदी बरामद की जा चुकी है। अब गहन जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि कुल कितने करोड़ रुपयों और सोने-चांदी के जेवरातों की हेराफेरी की गई है।

    6 जून को हुआ था पर्दाफाश, ट्रस्टी की तहरीर पर दर्ज हुआ केस

    राम मंदिर में दान राशि की चोरी का यह पूरा मामला पहली बार 6 जून को सामने आया था, जिसके बाद ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने अपने स्तर पर जांच शुरू की। इसके बाद 13 जून को मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी का गठन किया गया। एसआईटी ने 23 जून को शासन को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी, जिसमें तत्काल एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई थी। इसके बाद बृहस्पतिवार को ट्रस्टी कृष्ण मोहन की लिखित शिकायत पर कोतवाली रामजन्मभूमि में आधिकारिक मामला दर्ज किया गया।

    जानिए कौन है आरोपी और मंदिर में क्या थी इनकी भूमिका:

    • रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू: चंपत राय का बेहद करीबी और इस पूरी साजिश का मुख्य सूत्रधार। इसके पास ही गणना कक्ष की चाबियां रहती थीं और मंदिर की हर व्यवस्था में इसका सीधा दखल था।

    • लवकुश मिश्रा व अनुकल्प मिश्रा: ट्रस्ट के पदाधिकारी अनिल मिश्रा के रिश्तेदार (जीजा-साला)। दोनों की ड्यूटी चढ़ावा गिनने में लगी थी और इनके घरों से चोरी की बड़ी रकम बरामद हुई है।

    • मनीष यादव: मुख्य आरोपी टिन्नू यादव का भतीजा। यह भी नोटों की गिनती की प्रक्रिया में शामिल था और इसके पास से भी चोरी के पैसे मिले हैं।

    • अविनाश शुक्ला: चढ़ावा गणना कर्मी। सूत्रों के मुताबिक, इसके बैंक खाते से करीब 5 लाख रुपये बरामद होने की बात सामने आ रही है।

    • सुभाष श्रीवास्तव: गणना इंचार्ज, जिसकी देखरेख और निगरानी में नोटों की गिनती का पूरा काम होता था।

    • करुणेश पांडेय व रमाशंकर मिश्र: अनुकल्प और लवकुश के साथ मिलकर इस पूरी चोरी की साजिश और पैसों को ठिकाने लगाने में शामिल रहे।

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