लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी के दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह की विभिन्न कंपनियों से आयकर विभाग द्वारा 400 करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम टैक्स वसूला जाएगा। उनके विभिन्न ठिकानों पर पूर्व में मारे गए छापों के दौरान मिले ठोस सुबूतों और टैक्स चोरी के पुख्ता प्रमाणों का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद विभाग की इंवेस्टीगेशन विंग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे अब अंतिम निर्धारण के लिए नई दिल्ली स्थित आयकर मुख्यालय भेजा जा रहा है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, इन आरोपी कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध खनन किए जाने के कारण राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व की भारी क्षति उठानी पड़ी थी, और साथ ही आयकर विभाग को भी नियमों के मुताबिक कर का भुगतान नहीं किया गया था।
फरवरी माह में मारे गए थे 30 से अधिक ठिकानों पर छापे
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक रहे उमाशंकर सिंह का बीते 6 अगस्त को निधन हो चुका है। इससे पूर्व इसी साल फरवरी माह में आयकर विभाग की इंवेस्टीगेशन विंग ने लखनऊ, बलिया, सोनभद्र, मिर्जापुर, प्रयागराज और कौशांबी समेत 30 से अधिक ठिकानों पर एक साथ बड़े पैमाने पर छापे मारे थे। इन छापों के दौरान अवैध खनन और बेनामी संपत्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ-साथ 10 करोड़ रुपये की नकदी भी बरामद की गई थी।
यह कार्रवाई उनकी 'छात्रशक्ति कंस्ट्रक्शन कंपनी' और 'साईं राम इंटरप्राइजेज' के नाम से सड़क निर्माण व खनन से जुड़े कार्यों में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी को अंजाम दिए जाने के पुख्ता सुबूत मिलने के बाद की गई थी। दरअसल, आयकर विभाग ने नियंत्रक-महालेखापरीक्षक यानी सीएजी (CAG) की उस रिपोर्ट के आधार पर अपनी जांच का दायरा बढ़ाया था, जिसमें सोनभद्र में हुए अवैध खनन से लगभग 60 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का विशेष रूप से उल्लेख किया गया था। इसके अलावा, आयकर विभाग ने मिर्जापुर और सोनभद्र में आधुनिक ड्रोन तथा सेटेलाइट इमेजिंग तकनीकों की मदद से भी अवैध खनन के डिजिटल सुबूत जुटाए थे।
जांच के दायरे में आए खनन विभाग के कई अधिकारी और नौकरशाह
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, आयकर विभाग की इस तैयार रिपोर्ट में खनन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता और भूमिका का भी स्पष्ट जिक्र किया गया है, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान इस बड़े अवैध खनन पर पूरी तरह से चुप्पी साधे रखी और कथित तौर पर इन कंपनियों से अनुचित रूप से उपकृत होते रहे। इस उच्चस्तरीय जांच के दायरे में खनन निदेशालय के कई बड़े अधिकारी भी आए थे, जिनसे विभाग द्वारा कड़े सवाल-जवाब किए गए थे।
छापेमारी के दौरान आयकर अधिकारियों के हाथ ऐसे कई गोपनीय दस्तावेज भी लगे थे, जिनसे यह साबित होता है कि इन कंपनियों द्वारा कई रसूखदार नौकरशाहों को भी अवैध रूप से उपकृत किया गया था। अब आयकर विभाग का केंद्रीय मुख्यालय उमाशंकर सिंह की इन सभी कंपनियों पर टैक्स चोरी की कुल वास्तविक रकम का अंतिम निर्धारण करेगा। इस पूरी निर्धारण प्रक्रिया के दौरान कंपनी के संचालकों और प्रबंधकों को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर प्रदान किया जाएगा।


