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    भारत हिंदू राष्ट्र है, इसे सबको स्वीकार करना है…उमा भारती बोलीं- शिवराज और मैंने जो नीति बनाई उसे आगे बढ़ाने की जरूरत

    भोपाल। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती (Uma Bharti) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- मुझे खुशी है कि हिंदू एकता, हिंदुराष्ट्र की बात धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कही है। बुंदेलखंड से ही ऐसी विभूतियां निकलती है। एक बात है कि भारत हिंदू राष्ट्र है। इसे स्वीकार करना है सबको। यदि हिंदू राष्ट्र है इसलिए सेक्युलर है, जहां जहां हिंदू खतरे में आया वहां इस राष्ट्र में ही कई उदाहरण है। इस्लाम, जैन, बुद्ध, ईसाई कोई नहीं था तब सनातन था। हिंदू ने सबको स्थान दिया किसी की मान्यताओं से इनकार नहीं किया। अन्य धर्मों को सोचना होगा समझना होगा कि हिंदू का मलतब ही विविधता में एकता। भारत हिंदू स्टेट नहीं है यह होगा भी नहीं। हिंदू में एकता हो जातपात से परे हो यह जरूरी है।जातियों में विभागजन के कारण ही कई समस्याएं इतिहास में है।

    हिंदू एकता का आधार क्या है। आधार है आर्थिक समानता। हिंदू समाज में एकता के लिए जरूरी है कि सत्ता शासन और प्रशासन का एक होना। सरकारी स्कूल हो या प्राइवेट स्कूल हो या फिर सरकारी अस्पताल और निजी में अंतर क्यों, यह नहीं होना चाहिए। सत्ता शासन और प्रशासन में सबकी भागीदारी समान होना जरूरी है। आरक्षण एक मजबूरी है, यह संवैधानिक बाध्यता है। अब समाज में एक लहर उठने की जरूरत है। सत्ता, शासन और प्रशासन में पदों के वजन बराबर हो। एक विशेष वर्ग पर भारी संपत्ति है, इसे दूर करने का काम मोदी ने किया है। यह सबसे बड़ा उदाहरण है।

    अन्य जातियों के बेटी और रोटी का संबंध स्थापित करने से हिंदू एकता को बड़ा बल मिलेगा। हिंदू एकता के लिए अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। मेरे घर में ही अंतर जाति विवाह हुए हैं। किसानों के गौ पालन से गाय बचेगी। इसके लिए सरकार और किसान को आगे आना होगा। शिवराज और मैंने आज जो नीति बनाई, मोहन को उसे आगे बढ़ाने की जरूरत है। निजी क्षेत्र के आरक्षण देना होगा। आर्थिक आधार पर आरक्षण पर विचार किया जाना चाहिए। उस वक्त भी योग्यता में कमी नहीं थी किसी भी वर्ग में वहां तब सुविधाओं का आभाव था। अब विचार हो तो एकता समानता होगी, परिस्थिति अलग होगी।

    सड़क खराब जो जाती है भ्रष्टाचार के कारण होती हैं। गायों की भी मौत हो रही है। सड़कों पर बैठना पड़ा तो बैठेंगे। राजनीति आकांक्षा के संबंध में कहा – ना में हाशिए पर हूं और ना में किसी की तलाश में हूं। मुझे जो भी जिम्मेदारी मिलेगी उसे निभाने के लिए मैं तैयार हूं। खासकर गंगा से जुड़ी गौ माता से जुड़ी जिम्मेदारी। राहुल गांधी का क्या है, जनेऊ पहनने का नाटक करते हैं। अभी गाय का मुद्दा बड़ा हो जाए तो गोबर की टीका लगाकर जेब में गौ मूत्र लेकर चलने लगेगा राहुल। इनका क्या है नाटक करने में एक नंबर।

    क्या विकास के लिए शीर्षासन करना होगा। विकास के नाम पर गाय का नाश, नदी का नाश पहाड़ों का नाश कर रहे हैं। जरूरी है कि इस दिशा में कदम उठाया जाए। जीडीपी के लिए पीछे सब कुछ नहीं छोड़ देना चाहिए। दो साल पूरे हो रहे हैं मोहन सरकार के, तीन चुनौतियां मुझे लगती हैं। जो निवेश ला रहे हैं, उसे जमीन पर उतरना, शराबबंदी और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण की ठोस व्यवस्था।

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