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    भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत, किसी भी वैश्विक संकट से निपटने में सक्षम: CEA

    नई दिल्ली देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने भारत की आर्थिक सेहत को लेकर एक बेहद सकारात्मक और मजबूत तस्वीर पेश की है। एक विशेष आर्थिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि देश का बाह्य (एक्सटर्नल) क्षेत्र अब पहले की तुलना में कहीं अधिक सुदृढ़ हो चुका है और भारत की समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकॉनॉमिक) बुनियाद किसी भी प्रकार के वैश्विक झटकों व उतार-चढ़ाव का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। नागेश्वरन ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर आने वाले जोखिम अब काफी हद तक कम हो गए हैं, जिसके चलते भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पर घरेलू मुद्रा 'रुपये' की विनिमय दर को नियंत्रित करने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) को झोंकने का दबाव बेहद कम हुआ है। उन्होंने कहा कि बुद्धिमत्तापूर्ण वित्तीय प्रबंधन और सटीक समय पर किए गए नीतिगत सुधारों की बदौलत बाह्य मोर्चे की सबसे जटिल और चुनौतीपूर्ण अवधि अब बीत चुकी है। इसके साथ ही उन्होंने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा जताए गए 6.6 प्रतिशत के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर के अनुमान पर पूर्ण सहमति व्यक्त की।

    आठ फीसदी की विकास दर का लक्ष्य और भू-राजनीतिक संकटों की संभावित चुनौतियां

    मुख्य आर्थिक सलाहकार ने 'विकसित भारत' के दीर्घकालिक संकल्प को साकार करने का रोडमैप साझा करते हुए कहा कि देश को एक लंबी अवधि तक निरंतर लगभग आठ प्रतिशत की वार्षिक आर्थिक विकास दर को बनाए रखना होगा। हालांकि, इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य के रास्ते में आने वाले वैश्विक गतिरोधों के प्रति सचेत करते हुए उन्होंने कहा कि यदि पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहा भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के हालात लंबे समय तक खिंचते हैं, तो इसका सीधा असर भारत की रफ्तार पर पड़ सकता है। उन्होंने आगाह किया कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर जाती हैं, तो देश की विकास दर प्रभावित होकर छह प्रतिशत के दायरे में सिमट सकती है।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का युग, रोजगार के नए अवसर और तकनीकी कौशल की अनिवार्यता

    भविष्य के रोजगार और बदलती हुई तकनीक के विषय पर विमर्श करते हुए अनंत नागेश्वरन ने इस बात पर विशेष बल दिया कि कार्यबल को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती स्वीकार्यता के बीच नए कौशल और हुनर से लैस होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को ऐसे आधुनिक कौशल सीखने होंगे जो एआई तकनीक के पूरक बन सकें, जिससे ऑटोमेशन (स्वचालन) के कारण पैदा होने वाले विस्थापन के खतरे को न्यूनतम किया जा सके। इसी मंच पर नीति आयोग के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अमिताभ कांत ने भी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक बुनियादी और सामान्य तकनीक का रूप ले लेगी, इसलिए भारत को इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनने के लिए एक विशाल डेटा रिसोर्स और मजबूत टैलेंट पूल तैयार करने की आवश्यकता है।

    निजी निवेश में तेजी, मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र से मिलेगी ऊर्जा

    आर्थिक मोर्चे पर सकारात्मक बदलावों की कड़ियों को जोड़ते हुए मुख्य आर्थिक सलाहकार ने बताया कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्टेड) कॉर्पोरेट कंपनियों ने नए सिरे से पूंजीगत निवेश (केपेक्स) बढ़ाना शुरू कर दिया है, जो देश में निजी निवेश चक्र के पुनरुद्धार का एक बड़ा और पुख्ता संकेत है। इसके अतिरिक्त, देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी आने वाले समय में विकास को बड़ा सहारा मिलने की पूरी उम्मीद है। नागेश्वरन ने आगामी खरीफ फसल सत्र को लेकर उत्साहजनक रुख प्रकट करते हुए कहा कि देश के प्रमुख जलाशयों में पानी का बेहतर संचयन और बुवाई के अनुकूल हालात कृषि क्षेत्र के उत्पादन को नई गति देंगे। इस दौरान अमिताभ कांत ने एआई को एक क्रांतिकारी युगांतरकारी शक्ति करार देते हुए कहा कि यह तकनीक औद्योगिक क्रांति में बिजली और कंप्यूटर के आविष्कार से भी कहीं अधिक व्यापक पैमाने पर वैश्विक उत्पादकता में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज कराएगी।

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