ग्वालियर। प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर के बाहर हुए भीषण सड़क हादसे की मजिस्ट्रियल जांच आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी गई है। जिला कलेक्टर रुचिका चौहान ने अपर कलेक्टर सीबी प्रसाद को निर्देश दिए हैं कि वे सात दिनों के भीतर अपनी जांच पूरी करके एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपें। इस मजिस्ट्रियल जांच के तहत बुधवार से दुर्घटना से जुड़े तमाम अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जांच के मुख्य बिंदु और अधिकारियों की जवाबदेही
जांच अधिकारी मुख्य रूप से इस बात की गहराई से पड़ताल कर रहे हैं कि प्रतिबंधित मार्ग पर भारी ट्रक आखिर कैसे दाखिल हुए, उन्हें प्रवेश किसने दिया और घटना के वक्त सुरक्षा व्यवस्था के लिए किस-किस की ड्यूटी लगाई गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करके उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, चीनौर घाटी की तरफ से भारी ट्रकों के मंदिर मार्ग तक पहुंचने की परिस्थितियों, प्रवेश की अनुमति देने वालों की भूमिका, मौके पर तैनात पुलिस व प्रशासनिक बल की संख्या और बैरिकेड लगाने के आदेशों के पालन की भी गहन समीक्षा की जा रही है।
चेक पॉइंट पर कथित अवैध वसूली की चर्चा
इस दर्दनाक हादसे के बाद पुलिस, जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों के बीच चेक पॉइंट पर होने वाली कथित अवैध वसूली को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं गर्म हैं। अधिकारियों के बीच दबी जुबान में यह गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं कि चेक पॉइंट पर तैनात कर्मचारियों ने कथित तौर पर दो-दो सौ रुपये की अवैध रकम लेकर उस भारी ट्रक को अंदर आने दिया था। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि मजिस्ट्रियल जांच के दौरान प्रवेश व्यवस्था की पड़ताल से इस बात की पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी। इसके साथ ही यह आशंका भी जताई जा रही है कि यदि ट्रक चालक आखिरी वक्त में अपनी सूझबूझ से स्टीयरिंग को मंदिर के मुख्य गेट की तरफ नहीं मोड़ता, तो उस समय श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होने के कारण जनहानि का यह आंकड़ा और भी अधिक भयावह हो सकता था।


