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    Homeदुनियापरमाणु ठिकानों पर ईरान का सख्त रुख, IAEA की एंट्री पर रोक

    परमाणु ठिकानों पर ईरान का सख्त रुख, IAEA की एंट्री पर रोक

    काठमांडू: नेपाल में राजनीतिक बदलाव के महज कुछ ही महीनों के भीतर प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार के सामने एक बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। सत्ता संभाले हुए अभी केवल 104 दिन ही हुए हैं कि वह युवा पीढ़ी (जेन-जेड), जिसने बालेन शाह को इस शीर्ष पद तक पहुँचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, अब उनके ही खिलाफ सड़कों पर उतर आई है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को गिराने में इसी युवा शक्ति का हाथ था, लेकिन अब बालेन सरकार के एक विवादास्पद फैसले ने इन युवाओं को आक्रोशित कर दिया है।

    नदी किनारे की अवैध बस्तियों पर चला बुलडोजर

    इस पूरे विवाद और जन-आक्रोश की मुख्य वजह काठमांडू में नदी के किनारों पर बसी अवैध बस्तियों को हटाने का सरकार का कड़ा अभियान है। दरअसल, बालेन शाह जब काठमांडू के मेयर थे, तभी से यह योजना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल थी। अब प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने पुलिस और सेना की तैनाती कर इन बस्तियों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसके तहत हजारों मकान ध्वस्त कर दिए गए हैं।

    • वैकल्पिक व्यवस्था न होने का आरोप: आंदोलनकारी जनता और युवाओं का सबसे बड़ा आरोप यह है कि सरकार ने इन बेघर हुए लोगों को पुनर्वासित करने (बसाने) के लिए कोई वैकल्पिक योजना नहीं बनाई।

    • बढ़ता आत्मदाह का सिलसिला: सरकार के इस बेरहम फैसले के विरोध में कई लोग आत्मदाह जैसा आत्मघाती कदम उठा रहे हैं। हाल ही में एक व्यक्ति ने इस अभियान के विरोध में खुद को आग लगा ली जिससे उसकी मौत हो गई। इसके अलावा अश्विन राउत और विवेक मंडल नाम के व्यक्तियों ने भी आत्मदाह का प्रयास किया है, जिससे जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

    माइतीघर में प्रदर्शन और प्रमुख युवा नेताओं की गिरफ्तारी

    नदी किनारे रहने वाले इन भूमिहीन लोगों (जिन्हें नेपाल में स्थानीय तौर पर 'कब्जेदार' कहा जाता है) के समर्थन में रविवार को काठमांडू के माइतीघर में एक विशाल विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार किया है:

    • हिरासत में लिए गए आंदोलन के मुख्य चेहरे: पुलिस ने इस जेन-जेड आंदोलन की अगुआई कर रहे और बालेन शाह को सत्ता में लाने वाले प्रमुख युवा नेताओं, माजिद अंसारी और सरिश्मा थापा को हिरासत में ले लिया है।

    • पुलिस प्रताड़ना के आरोप: प्रदर्शनकारी युवाओं का आरोप है कि उन्हें न केवल गैर-कानूनी ढंग से गिरफ्तार किया जा रहा है, बल्कि पुलिस हिरासत में उनके साथ बर्बरता और मारपीट भी की जा रही है। इस कार्रवाई के दौरान युवा नेता माजिद अंसारी गंभीर रूप से चोटिल हो गए हैं और फिलहाल अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

    नई सरकार के सामने अस्तित्व की बड़ी चुनौती

    एक अनुमान के मुताबिक, काठमांडू घाटी में करीब 3,500 लोग ऐसी बस्तियों में सालों से गुजर-बसर कर रहे हैं। बिना किसी पूर्व इंतजाम के इतनी बड़ी आबादी को उजाड़े जाने से पैदा हुआ यह मानवीय संकट अब सीधे एक राजनीतिक संकट में बदल चुका है। बालेन शाह सरकार के लिए सबसे बड़ी विडंबना और चुनौती यही है कि आज उन्हें उसी युवा वर्ग के तीखे विरोध और नारेबाजी का सामना करना पड़ रहा है, जो कभी उनकी सबसे बड़ी ताकत हुआ करता था।

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