More
    HomeदुनियाIRGC के हमलों का सिलसिला जारी, कुवैत बना नया निशाना

    IRGC के हमलों का सिलसिला जारी, कुवैत बना नया निशाना

    नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी सैन्य संघर्ष अब और अधिक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलीकॉप्टर के क्रैश होने के बाद, अमेरिकी वायुसेना ने ईरान पर जवाबी कार्रवाई करते हुए उसके चार प्रमुख ठिकानों को निशाना बनाया। इस अमेरिकी हमले से भड़के ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने भी तुरंत और भीषण पलटवार शुरू कर दिया है। ईरान ने बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट और जॉर्डन के मुवफ्फाक साल्टी एयरबेस (अल-अज़राक एयरबेस) पर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागने के बाद, अब अमेरिका के एक और बड़े रणनीतिक साझेदार कुवैत पर बड़ा हमला बोल दिया है।

    कुवैत पर हवाई हमले और एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव

    ईरान की आईआरजीसी (IRGC) ने तड़के सुबह कुवैत की सीमा में घुसकर कई हवाई हमले (एयरस्ट्राइक्स) किए हैं। इस अचानक हुए मिसाइल और ड्रोन हमले के बाद कुवैती सेना के जनरल स्टाफ ने देश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। कुवैत सरकार की ओर से आधिकारिक बयान जारी कर बताया गया है कि दुश्मन के इन हवाई हमलों को हवा में ही मार गिराने के लिए कुवैत के अत्याधुनिक 'एयर डिफेंस सिस्टम्स' को पूरी क्षमता के साथ एक्टिव कर दिया गया है। इसके साथ ही कुवैती सेना ने अपने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और केवल अधिकृत सरकारी स्रोतों से आने वाली खबरों पर ही भरोसा करते हुए सुरक्षा गाइडलाइंस का पालन करें।

    अमेरिकी सैनिकों के गढ़ 'अली अल सलेम एयरबेस' को बनाया निशाना

    ईरानी सेना ने कुवैत में विशेष रूप से 'अली अल सलेम एयरबेस' को अपना मुख्य निशाना बनाया है। सामरिक दृष्टि से यह एयरबेस अमेरिका के लिए मिडिल ईस्ट में सबसे महत्वपूर्ण और सुरक्षित सैन्य ठिकानों में से एक माना जाता है। इस एयरबेस की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां करीब 13,000 अमेरिकी सैनिक हर वक्त तैनात रहते हैं और अमेरिका के कई अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और घातक हथियारों का जखीरा भी यहीं मौजूद है।

    ईरान के साथ जारी इस युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना ने इसी एयरबेस का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हवाई हमलों के लिए किया है। यही वजह है कि ईरान इस एयरबेस को अपने लिए बड़ा खतरा मानता है और इसे निशाना बना रहा है। कुवैत लंबे समय से इस क्षेत्र में अमेरिका का सबसे करीबी सहयोगी रहा है, जिसके कारण वह अमेरिकी सेना को अपने एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति देता है, और अब इसी सहयोग की वजह से कुवैत को ईरान के सीधे गुस्से का सामना करना पड़ रहा है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here