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    लड़कों का कान छिदवाना शुभ या अशुभ, राहु-केतु से क्या है संबंध, जानें किस्मत पर इसका प्रभाव

    हिंदू धर्म में लड़का हो या लड़की, कान छिदवाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. बताया जाता है कि पहले जिन लड़कों के कान नहीं छिदे होते थे, उनको अंतिम संस्कार नहीं करने दिया जाता था. लेकिन समय बदलता गया और अब केवल लड़कियों के ही कान छेदे जाते हैं. लेकिन अब कान छिदवाना एक फैशल सिंबल बन गया है, जो लड़कियों के साथ-साथ लड़कों में भी काफी लोक प्रिय है. लेकिन क्या आपको पता है कि कान छिदवाने का संबंध ज्योतिष से भी है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, लड़के अगर कान छिदवाते हैं तो इसका असर उनकी किस्मत पर भी पड़ता है और राहु-केतु के अशुभ प्रभाव से मुक्ति भी मिलती है.

    भारतीय संस्कृति में कान छिदवाना
    भारतीय संस्कृति में लड़कों का दायां कान तो लड़कियों के दोनों कान छेदा जाता है. कान छिदवाने की परंपरा को कर्णवेध संस्कार बोला जाता है, यह सोलह संस्कारों में से नौंवा संस्कार है, जो बच्चे के जन्म के 6 महीने बाद करवाया जाता है. आज के दौर में कान छिदवाना फैशन सिंबल भी बन गया है और यह फैशन लड़कियों के साथ-साथ लड़कों में भी काफी देखने को मिल रहा है. आज कल आपने कई लड़कों को कान में पियर्सिंग करवाते हुए देखा होगा. हालांकि लड़कों का कान में पियर्सिंग करवाना मेंटल हेल्थ के लिए अच्छा माना जाता है. काने छिदवाने का ना केवल ज्योतिष फायदा बल्कि इसके कई वैज्ञानिक कारण भी है.

    ज्योतिष में लड़कों का कान छिदवाना
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, लड़के या लड़की के कान में छेद होना राहु और केतु के नकारात्मक प्रभाव को कम करता है. इसलिए कई ज्योतिष कान में सोना पहनने की सलाह देते हैं. आपने देखा होगा कि प्राचीन समय में ऋषि-मुनि, देवता और भगवान भी अपने कान में कुंडल पहनते थे क्योंकि उनको पता था कि यह संस्कार मानसिक विकास के लिए जरूरी है. लेकिन समय के साथ कान छिदवाना एक फैशन बन गया और लड़कियों तक सीमित कर दिया. हालांकि फैशन के दौर में बहुत से लड़के अब कान छिदवाना शुरू कर दिया लेकिन अगर यह काम बचपन में ही हो जाता तो उनको इसका पूरा लाभ मिल पाता.
    इस शुभ दिन में ही करवाएं कान में पियर्सिंग
    कान की पियर्सिंग शरीर की आंतरिक ऊर्जा को जगाता है और आपके आज्ञा चक्र यानी तीसरे नेत्र को सक्रिय भी करता है, जिससे आपको ध्यान लगाने में भी मदद मिलती है. साथ ही कान में पियर्सिंग करवाने से जीवन में आर्थिक समृद्धि आने लगती है. वहीं कान की पियर्सिंग करवाने के लिए शुभ दिनों का भी विशेष महत्व है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, कान छिदवाने के लिए पुष्य, रोहिणी और हस्त नक्षत्र के दिन करवाना शुभ होता है. वहीं ग्रहण काल या राहुकाल में ऐसा करना अशुभ माना गया है क्योंकि इन काल में करवाई गई पियर्सिंग और छेद शुभ प्रभाव नहीं देते हैं.

    कान छिदवाने वैज्ञानिक लाभ
    कान छिदवाने के केवल ज्योतिष ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक फायदे भी हैं. कान में पियर्सिंग करवाने से मेंटल हेल्थ अच्छी रहती है और हमारी शरीर की ऊर्जा भी सक्रिय रहती है. साथ ही सुनने की शक्ति, आंखों की रोशनी और मस्तिष्क का विकास होता है. लड़का या लड़की जब कान छिदवाते हैं तब मस्तिष्क के हिस्से सक्रिय हो जाते हैं और दिमागी शक्ति में भी वृद्धि होती है. कान के छिदने से दिमाग की नसों का दवाब कम हो जाता है. लकवा, दिमाग सुन्न होना, अस्थमा और टीबी जैसी समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है.

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