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    क्या गौतम गंभीर और चयनकर्ताओं में तालमेल नहीं है? आकाश चोपड़ा ने उठाए सवाल

    ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर के चोटिल होने के बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ बाकी दो वनडे मैचों के लिए आयुष बडोनी को टीम इंडिया में जगह मिली है। इसे लेकर पूर्व क्रिकेटर और कॉमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने सवाल उठाए हैं। सवाल ये कि क्या टीम मैनेजमेंट और बीसीसीआई के सिलेक्शन कमिटी में तालमेल की कमी है? क्या कप्तान शुभमन गिल और मुख्य कोच गौतम गंभीर की जोड़ी और अजीत अगरकर की अगुआई वाली चयन समिति की टीम और उसकी जरूरतों को लेकर सोच अलग-अलग है? चोपड़ा ने ये सवाल ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी को केंद्र में रखकर उठाए हैं।

    पापुआ न्यू गिनी
    131/6
    20.0 ov
    ज़िम्बाब्वे
    40/0
    6.0 ov
    ज़िम्बाब्वे को 84 गेंदों में 6.57 प्रति ओवर की औसत से 92 रन चाहिए
    बांग्लादेश
    151/3
    20.0 ov
    नीदरलैंड
    73/3
    11.0 ov
    नीदरलैंड को 54 गेंदों में 8.77 प्रति ओवर की औसत से 79 रन चाहिए
    आयरलैंड
    200/7
    20.0 ov
    नेपाल
    12/1
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    नेपाल को 96 गेंदों में 11.81 प्रति ओवर की औसत से 189 रन चाहिए

    नीतीश रेड्डी वाली पहेली

    आकाश चोपड़ा ने कहा कि 22 वर्ष के इस ऑलराउंडर को टीम इंडिया के तकरीबन हर स्क्वाड में लिया जा रहा है लेकिन मुश्किल से उसे मौका दिया जा रहा है। जब मौका दिया भी जा रहा तो उसकी पूरी क्षमता का इस्तेमाल तक नहीं किया जा रहा।आकाश चोपड़ा ने एक्स पर शेयर अपने वीडियो में कहा, ‘क्या सिलेक्टर और कोचिंग स्टाफ में तालमेल नहीं है? मैं नहीं समझ पा रहा हूं कि नीतीश रेड्डी को लेकर क्या चल रहा है। वह हर फॉर्मेट में चुने जा रहे हैं। जब वह खिलाए जाते हैं तो बैटिंग नहीं करते और गेंदबाजी में भी बहुत कम गेंदें फेंकते हैं।’

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    चोपड़ा ने कहा, ‘वाइट-बॉल क्रिकेट में सिलेक्टर उन्हें चुन रहे हैं लेकिन उन्हें मैच नहीं मिल रहे। दक्षिण अफ्रीका के साथ सीरीज के दौरान बहुत सारी ओस दिख रही थी। तेज गेंदबाजों का बहुत इस्तेमाल किया जा रहा था। स्पिनरों को मदद नहीं मिल रही थी लेकिन तब भी नीतीश रेड्डी का इस्तेमाल नहीं हुआ।’

    'रेड्डी टीम में तो होते हैं लेकिन उनका पूरा इस्तेमाल नहीं होता'

    आकाश चोपड़ा ने आगे कहा, 'और जब हम वडोदरा पहुंचते हैं तो फिर वही कहानी होती है कि नीतीश कुमार रेड्डी को नहीं खिलाया जाता है। सवाल फिर उठता है कि ऐसा क्यों है कि सिलेक्टर ये सोचते हैं कि नीतीश को सिलेक्ट करना जरूरी है। वो टीम को एक बैलेंस प्रदान करते हैं। वो फ्यूचर के लिए रेडी करते हैं कि अगर हार्दिक पांड्या कभी ना हुए तो क्या होगा…लेकिन टीम मैनेजमेंट ये नहीं सोचती है।उन्होंने कहा, ‘वो (टीम मैनेजमेंट) कहती है कि हमें नीतीश कुमार रेड्डी नहीं चाहिए। हम 2 स्पिनर्स के साथ खेलें या 3 स्पिनर्स के साथ खेलें। हमारे स्कीम्स ऑफ थिंग्स में नीतीश कुमार रेड्डी सेट नहीं होते हैं और जब होते हैं तो वह या तो बैटिंग करते हैं या बोलिंग करते हैं, दोनों चीजें साथ नहीं करते हैं। असल में चल क्या रहा है? अगर उन्हें बाहर ही बैठना है तो ये बेहतर होता कि वह विजय हजारे ट्रॉफी में खेलते।'रेड्डी ने अब तक टीम इंडिया के लिए 2 ओडीआई और 4 टी20 इंटरनेशनल खेले हैं। ये हाल तब है जब करीब एक साल से वह तकरीबन हर स्क्वाड का हिस्सा हैं। ऐसा लग रहा कि उन्हें हार्दिक पांड्या के बैकअप के तौर पर तैयार किया जा रहा लेकिन जब पांड्या नहीं खेलते तब भी उन्हें बमुश्किल मौका मिलता है।

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