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    Jharkhand HC सख्त, भवन नक्शा मंजूरी मामले में रांची के तीन पक्षों से मांगा जवाब

    रांची: झारखंड हाई कोर्ट में कचहरी चौक स्थित एक विवादित प्लॉट पर कमर्शियल बिल्डिंग का नक्शा मंजूर किए जाने को लेकर दायर याचिका पर बुधवार को अहम सुनवाई हुई। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमीन मालिक, संबंधित बिल्डर और टाउन प्लानर संजीव कुमार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है, साथ ही रांची नगर निगम को भी निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि इस दौरान विवादित स्थल पर होने वाला कोई भी निर्माण कार्य याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रहेगा।

    प्रार्थियों का आरोप, मास्टर प्लान के नियमों को ताक पर रखकर दी गई मंजूरी

    याचिकाकर्ताओं मनोज कुमार साहू व अन्य के अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने अदालत को बताया कि कचहरी रोड स्थित आरएस प्लॉट संख्या 12 और 15 पर कमर्शियल बिल्डिंग के लिए 15 दिसंबर 2025 को रांची नगर निगम द्वारा जारी नक्शा पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है। प्रार्थियों का दावा है कि नक्शे में जिस सड़क को दर्शाया गया है, वह असल में उनकी अपनी जमीन का हिस्सा है। इसके अलावा मास्टर प्लान-2037 के तहत प्लॉट संख्या 15 का उपयोग केवल कमर्शियल के बजाय कमर्शियल और रेजिडेंशियल दोनों के लिए तय है, बावजूद इसके निगम ने केवल व्यावसायिक नक्शा स्वीकृत कर दिया।

    अपर बाजार के दुकानदारों को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, पीड़क कार्रवाई पर रोक

    एक अन्य मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने राजधानी के अपर बाजार के दुकानदारों को बड़ी राहत प्रदान की है। अदालत ने रांची नगर निगम की तरफ से नक्शा विचलन और पार्किंग न होने के आरोप में दुकानदारों को जारी किए गए नोटिस के आधार पर किसी भी तरह की दंडात्मक और पीड़क कार्रवाई करने पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। दुकानदारों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता देवेश अजमानी ने अदालत को बताया कि निगम ने बिना उचित सुनवाई का मौका दिए यह नोटिस थमाया है।

    नगर निगम को जवाब दाखिल करने का निर्देश, तीन सप्ताह बाद अगली सुनवाई

    अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रांची नगर निगम को नोटिस पर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। वहीं, कमर्शियल बिल्डिंग नक्शा मामले की अगली सुनवाई अब से ठीक तीन सप्ताह बाद निर्धारित की गई है। कोर्ट के इन फैसलों से प्रभावित पक्षों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है और मामले में प्रशासनिक एवं न्यायिक प्रक्रिया तेज हो गई है।

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