More
    Homeधर्म-समाजबिहार का कामाख्या धाम! 19 मार्च से राजकीय महोत्सव शुरू, जानें गुवाहाटी...

    बिहार का कामाख्या धाम! 19 मार्च से राजकीय महोत्सव शुरू, जानें गुवाहाटी के बाद यहां मां के रुकने का रहस्य

    असम के गुवाहाटी के बाद देश का दूसरा और बिहार का इकलौता कामाख्या माता मंदिर एक बार फिर उत्सव के रंग में डूबने को तैयार है. पूर्णिया जिले के मजरा पंचायत स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ कामाख्या मंदिर में आगामी 19 मार्च से 28 मार्च तक राजकीय कामाख्या महोत्सव की धूम रहेगी. राजकीय महोत्सव का दर्जा मिलने के बाद इस बार आयोजन को लेकर प्रशासन और स्थानीय मंदिर कमेटी की ओर से भव्य तैयारियां की जा रही हैं. आइए जानते हैं इस पर क्या खास होने वाला है.

    700 साल पुराना इतिहास और गहरी आस्था
    पूर्णिया का यह मंदिर लगभग 700 साल पुराना है. अपनी सिद्धपीठ मान्यताओं के लिए देशभर में प्रसिद्ध है. स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था है कि यहां आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है. मंदिर के पुजारी पवन कुमार झा और गौरीकांत झा बताते हैं कि इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका मंगलवार का दिन है. मान्यता है कि हर मंगलवार को मां कामाख्या साक्षात गुवाहाटी से चलकर यहां पधारती हैं. इस खास दिन भक्त अपनी मुरादें लेकर आज्ञा पान के जरिए माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
    राजकीय दर्जा और मंत्री लेशी सिंह का प्रयास
    मजरा पंचायत स्थित इस मंदिर को वैश्विक पहचान दिलाने में बिहार सरकार की खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री सह क्षेत्रीय विधायिका लेशी सिंह की अहम भूमिका रही है. उनके अथक प्रयासों से ही इसे न केवल पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया, बल्कि बिहार सरकार ने इसे राजकीय महोत्सव का दर्जा भी दिया. मेला कमेटी के अध्यक्ष संतोष मिश्रा और स्थानीय सदस्य अजय गोस्वामी ने बताया कि राजकीय सम्मान मिलने के बाद मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

    महोत्सव का स्वरूप और कार्यक्रम
    28 मार्च तक चलने वाले इस नौ दिवसीय महोत्सव में धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की त्रिवेणी बहेगी. महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक संध्या का आयोजन होगा. इसमें स्थानीय और आमंत्रित कलाकारों द्वारा भजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी. भव्य मेला में नौ दिनों तक चलने वाले मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और विधि व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. आध्यात्मिक कार्यक्रम में प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना और माता का श्रृंगार किया जाएगा. पर्यटन विभाग की देखरेख में अब मंदिर परिसर को और अधिक भव्य रूप दिया जा रहा है, ताकि यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो. पूर्णिया के इस महोत्सव ने अब एक बड़े धार्मिक आयोजन के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर ली है.

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here