नई दिल्ली। देश की राजधानी में इथेनॉल मिश्रित (E20) पेट्रोल की अनिवार्यता को लेकर एक नया राजनीतिक संग्राम छिड़ गया है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और 'आप' संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की इस नीति के विरोध में मोर्चा खोलते हुए प्रधानमंत्री आवास की ओर पैदल मार्च का आह्वान किया है। आम आदमी पार्टी का दावा है कि E20 ईंधन जबरन लागू किए जाने से देश के करोड़ों वाहन चालकों की जेब पर सीधा डाका पड़ रहा है और उनके वाहन समय से पहले खराब होने की कगार पर पहुँच रहे हैं।
लाखों हस्ताक्षरों के साथ पीएम से संवाद की अपील
प्रदर्शन के मोर्चे पर डटे 'आप' प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि कार्यकर्ता करीब 2.33 लाख नागरिकों द्वारा हस्ताक्षरित याचिकाओं का बंडल लेकर प्रधानमंत्री को सौंपने आए हैं। उनका कहना है कि जनहित के इस संवेदनशील मसले पर केंद्र सरकार को जिद छोड़कर विपक्ष की बात सुननी चाहिए और संवाद के रास्ते खोलने चाहिए।
वाहन चालकों के आर्थिक नुकसान पर घेराबंदी
सांसद संजय सिंह और अरविंद केजरीवाल ने इस पूरी कवायद को विदेशी व्यापार दबाव का नतीजा करार दिया। 'आप' नेताओं का कहना है कि भारतीय सड़कों पर दौड़ रहीं लगभग 30 करोड़ पुरानी गाड़ियां E20 पेट्रोल झेलने में सक्षम नहीं हैं, जिससे इंजन को गंभीर क्षति पहुँचेगी। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे अंतरराष्ट्रीय दबावों से दूर रहकर महंगे आयातित इथेनॉल की खरीद पर रोक लगाएं और जनता को राहत प्रदान करें।
भाजपा का तीखा पलटवार: राजनीति में सिर्फ 'अराजकता' का मुकाबला
दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी के इस उग्र विरोध पर सत्ता पक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा सांसद हर्ष मल्होत्रा ने तंज कसते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल को जनता के मुद्दों से कम और अपनी अराजक राजनीति को चमकाने में ज्यादा दिलचस्पी है। उन्होंने हमला बोलते हुए कहा कि विपक्षी दिग्गजों के बीच इस बात की होड़ मची है कि खुद को देश का 'नंबर वन अराजकतावादी' कौन साबित करता है।


