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    खामेनेई ने ट्रंप पर किया तीखा प्रहार कहा- अहंकार ही ट्रंप के पतन का कारण बनेगा

    तेहरान। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सीधा और बेहद तल्ख हमला बोला है। तेहरान में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक संदेश में खामेनेई ने ट्रंप को दुनिया का सबसे अहंकारी शासक करार दिया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भी किसी तानाशाह का घमंड अपने चरम पर पहुँचा है, उसका पतन निश्चित हुआ है। खामेनेई ने ट्रंप की तुलना इतिहास के क्रूर पात्रों फिरौन, निमरोद और ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी से करते हुए कहा कि वर्तमान अमेरिकी नेतृत्व भी उसी विनाशकारी रास्ते पर है।
    खामेनेई ने अपने बयान में धार्मिक और ऐतिहासिक प्रतीकों का गहराई से उपयोग किया। उन्होंने कहा कि जो अमेरिकी राष्ट्रपति पूरी दुनिया के बारे में अहंकार से फैसले लेते हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि तानाशाही का अंत हमेशा बुरा होता है। उन्होंने फिरौन का उदाहरण दिया, जिसे इस्लामी और बाइबिल परंपराओं में अत्याचार का प्रतीक माना जाता है और जिसका अंत लाल सागर में डूबने से हुआ था। इसी तरह उन्होंने निमरोद का जिक्र किया, जिसका अंत एक मामूली मच्छर के कारण हुआ था—यह उदाहरण उन्होंने यह बताने के लिए दिया कि एक विशाल साम्राज्य का अहंकारी राजा भी तुच्छ चीज से पराजित हो सकता है।
    ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच खामेनेई का यह बयान काफी मायने रखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी अपनी ही सड़कों और संपत्तियों को नुकसान पहुँचाकर अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं। खामेनेई ने ट्रंप को नसीहत दी कि उन्हें दूसरों के मामलों में दखल देने के बजाय अपने देश की आंतरिक स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। इस बीच, ईरान के न्यायपालिका प्रमुख ने भी सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अधिकतम और बिना किसी कानूनी रियायत के कठोर कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी भी इस उथल-पुथल के बीच सक्रिय हो गए हैं। 1979 की इस्लामी क्रांति में बेदखल किए गए शाह के पुत्र रजा पहलवी ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे वर्तमान शासन के बजाय ईरानी जनता का साथ दें। उन्होंने इंटरनेट पाबंदियों के बावजूद लोगों से शांतिपूर्ण प्रतिरोध जारी रखने का आह्वान किया है। रजा पहलवी ने इन प्रदर्शनों को किसी एक नेता की पहल नहीं, बल्कि दशकों के दमन और आर्थिक बदहाली से उपजी जनता की पुकार बताया है। वर्तमान में ईरान में तनाव अपने चरम पर है। सुरक्षाबलों की कार्रवाई में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसे लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन और अमेरिकी प्रशासन चिंता जता चुके हैं। जहाँ ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन की बात कही है, वहीं ईरानी नेतृत्व इसे विदेशी साजिश करार दे रहा है। कुल मिलाकर, ईरान के भीतर का जनआक्रोश और बाहर से मिल रही कूटनीतिक धमकियों ने मध्य पूर्व की राजनीति में एक नया और गंभीर संकट पैदा कर दिया है।

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