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    हत्याकांड के विरोध में थम गए कोडरमा के पहिए: विधायक के ड्राइवर की मौत पर भड़के लोग, सड़क पर काटा हंगामा

    कोडरमा | भूमि विवाद के चलते कोडरमा विधायक डॉ. नीरा यादव के निजी ड्राइवर राजकुमार यादव की निर्मम हत्या के बाद पूरे इलाके में जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। गुरुवार को न्याय की मांग को लेकर मृतक के परिजनों और सैकड़ों ग्रामीणों ने कोडरमा थाने के ठीक सामने मुख्य मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया। लगभग दो घंटे तक चले इस चक्काजाम के कारण सड़क के दोनों तरफ गाड़ियों की मीलों लंबी कतारें लग गईं, जिससे आम राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और स्थानीय यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई।

    मुआवजे और आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाने की मांग

    सड़क पर उतरे उग्र प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मांग की कि हत्याकांड में शामिल सभी नामजद आरोपियों को अविलंब सलाखों के पीछे भेजा जाए। इसके साथ ही पीड़ित परिवार को तत्काल उचित आर्थिक मुआवजा देने और मामले की शुरुआत में ढिलाई बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर सख्त एक्शन लेने की मांग भी उठाई गई। इस दौरान माहौल तब और गरमा गया जब ग्रामीणों ने उत्तर प्रदेश की तर्ज पर इस जघन्य अपराध के दोषियों के मकानों पर बुलडोजर चलाने की पुरजोर मांग शुरू कर दी।

    आला अफसरों ने दिया आश्वासन, चार आरोपी पहले ही गिरफ्तार

    चक्काजाम और बढ़ते हंगामे की खबर मिलते ही अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) निर्मल सोरेन और पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) अरविंद कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे परिजनों और ग्रामीणों से काफी देर तक वार्ता की और उन्हें निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिलाया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में त्वरित एक्शन लेते हुए अब तक चार मुख्य आरोपियों को दबोचा जा चुका है, जबकि बाकी बचे फरार अपराधियों को पकड़ने के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। इस पुख्ता आश्वासन के बाद ही ग्रामीण सड़क से हटने को राजी हुए।

    थाना प्रभारी पर फूटा गुस्सा, लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप

    समारोह और प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कोडरमा के थाना प्रभारी विकास पासवान की कार्यशैली पर गंभीर उंगलियां उठाईं और उन्हें तुरंत पद से हटाने की मांग की। परिजनों का सीधा आरोप है कि जमीन से जुड़े इस विवाद को लेकर पहले भी थाने में लिखित शिकायतें दी गई थीं, लेकिन यदि समय रहते थाना प्रभारी ने उन पर ठोस कदम उठाए होते, तो आज राजकुमार की जान बच सकती थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस के आला अफसरों ने आश्वस्त किया है कि इस पूरे घटनाक्रम की आंतरिक जांच कराई जाएगी और यदि किसी भी स्तर पर पुलिसिया लापरवाही उजागर होती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय गाज गिरेगी।

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