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    खाद संकट से सबक, खरीफ सीजन के लिए सरकार का सख्त प्लान

    जयपुर। राजस्थान में रबी सीजन में खाद की कालाबाजारी और किल्लत बड़ा मुद्दा रहा था। प्रदेश में कई शहरों में खाद को लेकर लाठीचार्ज तक की नौबत आई। विधानसभा में भी खाद कि किल्लत बड़ा मुद्दा बनी थी। इसे देखते हुए इस बार खरीफ सीजन में खाद संकट से बचने के लिए सरकार बड़ी मात्रा में खाद का बफर स्टॉक तैयार कर रही है। कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार राज्य में 6.3 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे किसानों को सीजन के दौरान किसी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस बार प्रदेश में खाद के स्टॉक की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। 

    कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि फिलहाल 3.84 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 71 हजार मीट्रिक टन डीएपी, 67 हजार मीट्रिक टन एनपीके और 2.13 लाख मीट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धता पिछले वर्षों और कई अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर है और मांग के अनुसार जिलों में पहले से ही आपूर्ति की योजना तैयार कर ली गई है।

    उधर, उर्वरकों की कालाबाजारी और डायवर्जन पर रोक लगाने के लिए सरकार ने सख्त अभियान भी शुरू किया है। 29 मार्च से चल रहे इस राज्यव्यापी अभियान को 11 अप्रैल से और तेज कर दिया गया है, जिसके तहत अब तक 2,793 निरीक्षण किए जा चुके हैं। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल की निगरानी में चल रही कार्रवाई के दौरान 437 उर्वरक विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं 23 विक्रेताओं की बिक्री पर रोक लगाई गई है, 38 लाइसेंस निलंबित किए गए हैं और एक मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में भी छापेमारी की है। कालाडेरा जैसे इलाकों में यूरिया के गैर-कृषि उपयोग, जैसे प्लाईवुड, रेजिन, डीजल एग्जॉस्ट फ्लूड (DEF) और पशु आहार में इस्तेमाल की आशंका के चलते जांच की गई। अधिकारियों के अनुसार यह अभियान सब्सिडी वाले यूरिया के दुरुपयोग को रोकने पर केंद्रित है। डीलर दुकानों, गोदामों और औद्योगिक इकाइयों पर लगातार औचक निरीक्षण किए जा रहे हैं और गड़बड़ी मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

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