गुना। मामला बर्ष 2019 का थाना आरोन का विशेष लोक अभियोजक राकेश व्यास ने बताया कि दिनांक 21/08/19 को थाना आरोन में पदस्थ उप निरीक्षक मलखान सिंह परिहार मुखबिर सूचना पर से मुखबिर के बताए स्थान पर पहुंचे । जहां छिपकर मुखबिर की सूचना की तस्वीर करने लगे तभी लगभग 17:00 बजे मुखबिर के बताएं नाम हुलिया की संदेहिया आते दिखी जिसे रोककर नाम पता पूछा तो उसने अपना नाम अनीता उर्फ़ नीता पत्नी लालू उर्फ मर्दन सिंह बघेल बताया जिसे धारा 50 एनडीपीएस एक्ट का नोटिस देकर पंचनामा बनाया गया मुखबिर सूचना से अवगत कराया गया पंच एवं फोर्स के तलाशी संदेहिया को दिलाई गई तत्पश्चात समझ महिला पंचान के संदेहिया की तलाशी ली गई संदेहिया के कंधे पर जामुनी रंग के कपड़े के थैले को चेक करते समय उसके अंदर एक पारदर्शी पॉलिथीन के अंदर खाकी रंग के प्लास्टिक के लिफाफे में कुछ पदार्थ रख पाया एवं ₹7000 नगदी बरामद हुए जिसका बरामदी पंचनामा बनाया गया थैली में पारदर्शी पॉलिथीन के अंदर रखे पदार्थ को थैली काटकर चेक करने पर रगड़कर सूघ कर जलाकर फोर्स को चेक करा कर उसे स्वयं के अनुभव से एवं पंचान को चेक करने पर उपरोक्त मादक पदार्थ को गंजा होना पाया । जिसका पहचान पंचनामा बनाया गया मादक पदार्थ को समरस कर पंचनामा बनाया गया इलेक्ट्रॉनिक तोल कांटे पर थालिया को तोला गया तो उसका वजन 1 किलो 650 ग्राम मय थैली के पाया गया जिसका तोल पंचनामा बनाया गया जिसमें से सैंपल निकले गये।

आरोपीया का कृत्य धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत पाए जाने से मादक पदार्थ जप्त कर जप्ती पंचनामा बनाया गया और महिला आरक्षक की अभिरक्षा में देकर आरोपीया को गिरफ्तार कर गिरफ्तारी पंचनामा बनाया गया संपूर्ण कार्रवाई पश्चात वापस थाने पर आकर आरोपिया के विरुद्ध थाने की अपराध क्रमांक 425 /2019 धारा 8 / 20 एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया दौराने विवेचना साक्षीगणों के साथ कथन लेख किए गए मौके पर पहुंचकर मौका पंचनामा बनाए गया ।संपूर्ण कार्रवाई उपरांत अभियोग पत्र बिशोष न्यायालय एनडीपीएस एक्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया । न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत होने के बाद न्यायालय द्वारा आरोप विरचित किए गए एवं प्रकरण का विचारण प्रारंभ किया गया अभियोजन की ओर से अपने प्रकरण के समर्थन में न्यायालय में 10 साक्षीयों को परीक्षित कराया गया एवं 43 दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रदर्श करायें । बचाव पक्ष एवं अभियोजन पक्ष के तर्कों का न्यायालय द्वारा श्रवण किया गया जिसमें न्यायालय ने पाया कि अभियोजन अपने प्रकरण को न्यायालय में संदेह से परे प्रमाणित करने में सफल रहा है न्यायालय द्वारा अभियुक्त को धारा 8 की सहपठित धारा 20 (खा) (२)(आ) स्वापक औषधि एवं मन: प्रभावी पदार्थ अधिनियम 1985 में दोषी पाते हुए 4 वर्ष के सश्रम कारावास एवं ₹5000 के अर्थ दंड से दंडित करने का आदेश पारित किया। अभियुक्त को न्यायिक अभिरक्षा में ले कर जेल भेज दिया गया है अभियोजन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक राकेश व्यास द्वारा की गई।


