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    ED की बड़ी कार्रवाई: महादेव बेटिंग ऐप केस में 940.77 करोड़ की संपत्तियां कुर्क, विकास गर्ग पर शिकंजा

    रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क 'महादेव ऑनलाइन बुक' और 'स्काई एक्सचेंज' से जुड़े कथित धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस अवैध कारोबार से जुड़े व्यवसाई विकास गर्ग, उनके परिवार के सदस्यों और करीबियों की कुल 940.77 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Provisional Attachment) कर लिया है। रायपुर स्थित ईडी की क्षेत्रीय इकाई द्वारा यह सख्त कदम प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के विशेष प्रावधानों के तहत उठाया गया है।

    दिल्ली, गोवा और नैनीताल के आलीशान बंगलों सहित व्यावसायिक भूखंडों पर लगा सरकारी ताला

    जांच एजेंसी द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस नए अटैचमेंट ऑर्डर के तहत कुर्क की गई संपत्तियों में देश के वीआईपी क्षेत्रों जैसे दिल्ली, गोवा और नैनीताल में स्थित आलीशान आवासीय कोठियां, कई व्यावसायिक भूमियां, महंगे प्लॉट्स, विभिन्न कंपनियों के इक्विटी शेयर्स और बड़े पैमाने पर किए गए वित्तीय निवेश (फिक्स्ड डिपॉजिट व अन्य) शामिल हैं। प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि इन सभी चल-अचल संपत्तियों को खड़ा करने के लिए महादेव ऑनलाइन बुक और स्काई एक्सचेंज के माध्यम से कमाए गए काले धन को सफेद (रूट) किया गया था।

    छत्तीसगढ़ के दुर्ग में दर्ज मुकदमे से खुली थी परतें, अब देशव्यापी हुई जांच

    सट्टेबाजी के इस विशाल काले साम्राज्य की परतें सबसे पहले छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में दर्ज की गई एक पुलिस एफआईआर (FIR) के बाद खुलनी शुरू हुई थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए बाद में आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल सहित देश के कई अन्य राज्यों में दर्ज आपराधिक मुकदमों को भी ईडी ने अपनी इस वृहद जांच के दायरे में शामिल कर लिया। केंद्रीय एजेंसी का कहना है कि अब तक की तफ्तीश में इस ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी सिंडिकेट से जुड़े कई रसूखदार लोगों की प्रत्यक्ष भूमिका उजागर हुई है, जिन पर सीधे तौर पर जालसाजी, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र रचने और मनी लॉन्ड्रिंग करने के गंभीर आरोप तय किए गए हैं।

    अब तक करीब 3,800 करोड़ रुपये की कुल चल-अचल संपत्ति हो चुकी है सीज

    महादेव बेटिंग ऐप स्कैम में केंद्रीय जांच एजेंसी पहले भी कई चरणों में देश और विदेशों में ताबड़तोड़ छापेमारी कर बड़ी संपत्तियां जब्त कर चुकी है। ईडी के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस ताजा कार्रवाई से पहले तक करीब 2,825 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां अलग-अलग स्तर पर अटैच की जा चुकी थीं। वहीं, विकास गर्ग के खिलाफ हुई इस हालिया 940 करोड़ रुपये की कुर्की के बाद, इस पूरे सट्टेबाजी मामले में अब तक सीज की जा चुकी कुल वैध संपत्तियों का सरकारी मूल्य लगभग 3,800 करोड़ रुपये के विशाल आंकड़े तक पहुंच गया है।

    विदेशी धरती से संचालित होता था पूरा रैकेट, हर महीने 450 करोड़ की अवैध कमाई का अनुमान

    केंद्रीय जांचकर्ताओं का दावा है कि महादेव ऑनलाइन बुक और स्काई एक्सचेंज का पूरा मुख्य सर्वर और संचालन भारत से बाहर विदेशी धरती से रिमोटली नियंत्रित किया जा रहा था। इस गिरोह ने देश के भीतर पैर पसारने के लिए एक विशेष 'फ्रेंचाइजी मॉडल' का सहारा लिया, जिसके माध्यम से महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक एजेंटों और सब-एजेंटों का एक बड़ा भूमिगत नेटवर्क तैयार किया गया। इसी जाल के जरिए देश के लाखों युवाओं और लोगों को ऑनलाइन सट्टेबाजी की लत लगाकर ठगा गया। ईडी के वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, यह संगठित नेटवर्क प्रति माह लगभग 450 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अवैध कमाई भारत से बाहर भेज रहा था।

    अमेरिकी सॉफ्टवेयर फर्म 'एबिक्स' का सौदा भी आया जांच के घेरे में

    प्रवर्तन निदेशालय की जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसके मुताबिक मुख्य आरोपी विकास गर्ग ने अपनी स्वामित्व वाली कंपनी 'एराया लाइफस्पेसेज' के माध्यम से संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) की जानी-मानी सॉफ्टवेयर कंपनी 'Ebix' में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी थी। ईडी का पुख्ता आरोप है कि इस वैश्विक व्यापारिक सौदे को पूरा करने के लिए भी सट्टा ऐप से कमाए गए अवैध धन का ही इस्तेमाल किया गया था। इस मनी ट्रेल को छुपाने के लिए कई विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के जरिए चालाकी से रकम का निवेश कर इस डील को अंतिम रूप दिया गया था।

    विशेष पीएमएलए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल, आगे भी जारी रहेगी कुर्की की कार्रवाई

    प्रवर्तन निदेशालय इस पूरे नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए अब तक कई प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी कर चुका है, और जांच के आधार पर विशेष PMLA अदालत के समक्ष मुख्य आरोप पत्र (अभियोजन शिकायत) के साथ-साथ कई पूरक आरोप पत्र भी पेश किए जा चुके हैं। केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि इस सट्टा सिंडिकेट की कड़ियां बहुत गहरी हैं, इसलिए मामले की तफ्तीश अभी भी पूरी तत्परता से जारी है। जैसे ही इस मनी ट्रेल से जुड़े नए साक्ष्य या बेनामी संपत्तियों की जानकारी मिलेगी, आगे भी इसी तरह की सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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