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    तमिलनाडु में सरकार के बड़े फैसले, विधायकों की सुविधाएं बढ़ीं, हेल्थ कवर भी हुआ 25 लाख

    चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कई प्रमुख और बड़े फैसलों का ऐलान किया है, जिनका सीधा असर राज्य के किसानों, आम मरीजों और जनप्रतिनिधियों पर पड़ेगा। सरकार ने दुग्ध उत्पादकों के लिए दूध की खरीद कीमत बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर करने का फैसला किया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का दायरा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 25 लाख रुपये करने की घोषणा की गई है। इसके अलावा विधायकों के क्षेत्रीय कामकाज को सुगम बनाने के लिए उन्हें सरकारी वाहन उपलब्ध कराने की नई योजना भी सामने रखी गई है।

    दूध खरीद दर में बढ़ोतरी: किसानों को राहत

    तमिलनाडु सरकार ने दुग्ध उत्पादकों को राहत देते हुए दूध की सरकारी खरीद कीमत 42 रुपये प्रति लीटर तय करने की घोषणा की है। राज्य के किसान लंबे समय से पशु आहार, चारे और मजदूरी में हो रही बढ़ोतरी का हवाला देते हुए खरीद दर बढ़ाने की मांग कर रहे थे। हालांकि, 'तमिलनाडु मिल्क प्रोड्यूसर्स वेलफेयर एसोसिएशन' ने गाय के दूध के लिए 43 रुपये और भैंस के दूध के लिए 60 रुपये प्रति लीटर की मांग रखी थी। सरकार के इस कदम से सहकारी व्यवस्था से जुड़े हजारों उत्पादकों को सीधी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

    स्वास्थ्य बीमा कवर 5 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये

    स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री विजय ने 'मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना' का वार्षिक कवरेज दायरा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने का निर्णय लिया है। यह फैसला गंभीर बीमारियों और महंगे इलाज के दौरान आम परिवारों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करेगा। विजय सरकार ने अपने चुनावी वादों में हर परिवार को 25 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज देने का संकल्प व्यक्त किया था, जिसे अब अमलीजामा पहनाया जा रहा है।

    सभी विधायकों को मिलेगा सरकारी वाहन

    जनप्रतिनिधियों के क्षेत्रीय दौरे और प्रशासनिक कार्यों को गति देने के उद्देश्य से सरकार ने सभी विधायकों को सरकारी वाहन मुहैया कराने का फैसला किया है। सरकार का तर्क है कि इससे विधायकों को अपने क्षेत्रों में जाकर समस्याओं का जायजा लेने और जनता से सीधा संवाद स्थापित करने में आसानी होगी। इससे पहले भी मई में सरकार ने प्रशासनिक सेवाओं के लिए नए वाहनों को हरी झंडी दिखाई थी, हालांकि इस नए फैसले के बाद सरकारी खर्च को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

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