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    शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, IT शेयरों में बिकवाली से सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के

    मुंबई। गुरुवार को दिखाई गई मजबूती के बाद, सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही। शुरुआती ट्रेडिंग सेशन में ही चौतरफा बिकवाली के दबाव के कारण प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी भारी गिरावट के साथ धड़ाम हो गए। शुरुआती कारोबार के दौरान बीएसई का 30 शेयरों वाला सूचकांक सेंसेक्स 750 अंकों से अधिक का गोता लगाकर 76,694.65 के स्तर पर आ गया, जिसमें 715.33 अंक (0.92%) की वास्तविक गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 199.00 अंक (0.82%) की कमजोरी के साथ 24,000 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़ते हुए 23,969.00 के स्तर पर फिसल गया।

    आईटी सेक्टर की भारी बिकवाली ने बिगाड़ा सेंटीमेंट

    दलाल स्ट्रीट पर मचे इस कोहराम के पीछे मुख्य रूप से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) कंपनियों के शेयरों में हुई भारी बिकवाली जिम्मेदार रही। बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, आईटी इंडेक्स में करीब छह फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसने पूरे बाजार के घरेलू सेंटीमेंट को पूरी तरह से नीचे खींच लिया। इसके अलावा वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेत भी कमजोर रहे, जहां अमेरिकी एसएंडपी 500 फ्यूचर्स और जापान के टॉपिक्स इंडेक्स में 0.3% की गिरावट देखी गई। वहीं ऑस्ट्रेलिया के बाजारों सहित यूरोप का यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स भी 0.5% तक टूट गया।

    डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती से मिली राहत

    घरेलू शेयर बाजार में मची उठापटक के विपरीत, विदेशी मुद्रा बाजार से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर आई। शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये ने शानदार वापसी की और 10 पैसे की मजबूती दर्ज करते हुए 94.30 के स्तर पर पहुंच गया। इसके अतिरिक्त, प्राइमरी मार्केट (प्राथमिक बाजार) में भी सरगर्मी तेज रही, जहां आज से निवेशकों के लिए 'टर्टलमिंट आईपीओ' की बुकिंग का पहला दिन शुरू हो चुका है।

    भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से बाजार में रिकवरी की उम्मीद

    भले ही शुरुआती कारोबार में मंदी का माहौल रहा, लेकिन बाजार के जानकारों को उम्मीद है कि भारतीय बाजार जल्द ही इस झटके से उबरकर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेगा। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होगा। कच्चे तेल की घटती कीमतें, पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद और स्थिर होता रुपया आने वाले दिनों में निवेशकों के भरोसे को दोबारा बहाल करने में मदद कर सकते हैं।

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