भारत के सुप्रसिद्ध एवं दिग्गज मृदंगम वादक श्रीधर पार्थसारथी का शुक्रवार की सुबह अचानक निधन हो गया। वे 54 वर्ष के थे। पुणे के बालेवाड़ी क्षेत्र में आयोजित 'दिवाली पहाट' संगीत कार्यक्रम के दौरान मंच पर प्रस्तुति देते समय उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद वे बेहोश होकर गिर पड़े। उन्हें बचाने के सभी प्रयास विफल रहे। इस दुखद हादसे के बाद भारतीय संगीत जगत में गहरा शोक व्याप्त हो गया है और कला जगत से जुड़े उनके साथी व प्रशंसक सोशल मीडिया के जरिए उन्हें नम आंखों से अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
दर्शकों की फरमाइश और मंच पर आखिरी सांस
कार्यक्रम के प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पार्थसारथी ने अपने तय समय के मुताबिक शुरुआत में लगभग 5 से 10 मिनट तक मृदंगम वादन किया। इसके उपरांत वहां मौजूद श्रोताओं ने उनसे और बजाने का बार-बार आग्रह किया। दर्शकों के भारी उत्साह को देखते हुए उन्होंने 10 मिनट और प्रस्तुति दी। जब दर्शकों ने पुनः फरमाइश की, तो पार्थसारथी ने मुस्कुराते हुए दो अंतिम धुनें और बजाने की बात कही। इसी मनमोहक वादन के बीच अचानक उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया और वे मंच पर ही अचेत होकर गिर पड़े।
चिकित्सकीय प्रयास और अस्पताल की आधिकारिक पुष्टि
घटना घटित होते ही कार्यक्रम स्थल पर मौजूद चिकित्सकों ने बिना समय गंवाए तुरंत मंच पर पहुंचकर उन्हें सीपीआर देना शुरू कर दिया। तत्पश्चात एम्बुलेंस के माध्यम से उन्हें फौरन नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि घटनास्थल पर ही प्रारंभिक सीपीआर देना प्रारंभ कर दिया गया था, जिसे अस्पताल की आपातकालीन मेडिकल टीम ने भी जारी रखा। चिकित्सकों ने उन्हें पुनर्जीवित करने का हर संभव भरसक प्रयास किया, किंतु उन्हें बचाया नहीं जा सका।
संगीत जगत की हस्तियों ने दी भावुक श्रद्धांजलि
श्रीधर पार्थसारथी मृदंगम वादन की कला में अत्यंत निपुण थे। उन्होंने लुई बैंक्स जैसे जाने-माने संगीतकारों के साथ मंच साझा किया था तथा वे 'माइल्स फ्रॉम इंडिया' जैसी प्रतिष्ठित वैश्विक संगीत परियोजना के भी प्रमुख हिस्सा रहे थे। उनके निधन पर प्रख्यात गायक शंकर महादेवन ने अपने चार दशक पुराने संबंध को याद करते हुए भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि वे इस वज्रपात को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। लगभग 40 वर्ष पूर्व उनके पहले कर्नाटक संगीत कार्यक्रम में श्रीधर ने ही मृदंगम पर संगति की थी। महादेवन ने कहा कि एक कलाकार का मंच पर प्रस्तुति देते हुए विदा होना उनके अनूठे जीवन को दर्शाता है।
साथी कलाकारों की यादें और वादन शैली
पुणे के प्रसिद्ध सरोद वादक अनुपम जोशी ने भी पार्थसारथी के साथ बिताए क्षणों को याद करते हुए कहा कि वे अत्यंत शांत, सरल और नेक दिल इंसान थे। वे स्वभाव से कम भाषी थे, परंतु उनका संगीत स्वयं में सब कुछ बयां कर देता था। पार्थसारथी ने उस्ताद अल्ला रक्खा और उस्ताद जाकिर हुसैन जैसी महान हस्तियों के साथ भी लंबा काम किया था। वे मृदंगम से निकलने वाली एक-एक ध्वनि और उसकी स्पष्टता को लेकर बेहद सजग रहते थे, जिसकी वजह से उनके वादन में एक अद्भुत और अद्वितीय खूबी देखने को मिलती थी।


