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    पीओके में बढ़ते विरोध के बीच मुनीर का बड़ा कदम, 4,000 जवानों की मांग

    इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आगामी 15 जुलाई को होने वाले विशाल विरोध प्रदर्शनों और 'लॉन्ग मार्च' से पहले वहां की स्थानीय प्रशासन और हुकूमत के हाथ-पांव फूल गए हैं। क्षेत्र में संभावित बड़े पैमाने पर अशांति और नागरिक विद्रोह को दबाने के लिए स्थानीय गृह विभाग ने पाकिस्तान की केंद्रीय सरकार से हजारों अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की तत्काल तैनाती की गुहार लगाई है। एक लीक हुए गोपनीय आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, प्रदर्शनों को कुचलने के लिए इस्लामाबाद से 4,000 अतिरिक्त जवानों और पाकिस्तान रेंजर्स की सात विंग्स की मांग की गई है। यह आपातकालीन कदम संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रमुख नेता शौकत नवाज मीर सहित सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ताओं की हालिया गिरफ्तारी के बाद उपजे भयंकर जन आक्रोश के कारण उठाया गया है।

    अति संवेदनशील और गोपनीय पत्र से खुला राज

    पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के सचिव को 8 जुलाई को भेजा गया यह आधिकारिक पत्र बेहद संवेदनशील है, जिस पर 'अति आवश्यक और गोपनीय' (Most Urgent and Confidential) की मुहर लगी हुई है। यह दस्तावेज साफ तौर पर उजागर करता है कि पाकिस्तान समर्थित स्थानीय प्रशासन जेएएसी द्वारा चलाए जा रहे इस जन आंदोलन से बुरी तरह खौफजदा है। प्रशासन ने आंदोलनकारियों पर लंबे मार्च, चक्काजाम और अनिश्चितकालीन धरने आयोजित करने का आरोप लगाया है। सरकार का दावा है कि इस विरोध प्रदर्शन के कारण पूरे क्षेत्र में एक गंभीर सुरक्षा संकट पैदा हो गया है, जिससे निपटना अब स्थानीय पुलिस के बस से बाहर हो चुका है।

    50% जवानों को आधुनिक हथियारों से लैस रखने की मांग

    गोपनीय दस्तावेज के मुताबिक, मांगी गई यह अतिरिक्त फोर्स पीओके में पहले से मौजूद भारी सुरक्षा अमले के अलावा होगी। पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि इन सैनिकों की आवश्यकता प्रदर्शनकारियों के 'खतरे' को बेअसर करने, सरकारी इकबाल (कंट्रोल) को बनाए रखने और पहले से थकी हुई स्थानीय पुलिस को बैकअप देने के लिए है। प्रशासन ने विशेष मांग रखी है कि आने वाले सुरक्षाकर्मियों में से 50 प्रतिशत बल पूरी तरह से आधुनिक स्वचालित हथियारों और गोला-बारूद से लैस होने चाहिए, जबकि शेष 50 प्रतिशत को दंगा-रोधी गियर (Riot Control Gear) दिया जाना चाहिए। यदि दंगा-रोधी उपकरणों की कमी हो, तो उसे पाकिस्तान के केंद्रीय स्टॉक से पूरा करने को कहा गया है।

    प्रतिबंधित समूहों और हिंसा का लगाया आरोप

    पीओके प्रशासन ने इस पूरी अशांति और नागरिक असंतोष के लिए सीधे तौर पर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी को कटघरे में खड़ा किया है। सरकार का आरोप है कि पुंछ और रावलकोट में लगातार धरने दिए जा रहे हैं और पड़ोसी जिलों में रैलियां आयोजित कर जनता को हुकूमत के खिलाफ भड़काया जा रहा है। प्रशासन ने यह सनसनीखेज दावा भी किया है कि कुछ प्रतिबंधित समूहों से जुड़े सशस्त्र तत्व मुजफ्फरराबाद और मीरपुर डिवीजनों में शांति भंग करने की फिराक में हैं।

    सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों द्वारा आवश्यक खाद्य सामग्री ले जा रहे ट्रकों को आग के हवाले किया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि इस टकराव में अब तक चार सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं और 174 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं, हालांकि स्वतंत्र मानवाधिकार संगठनों द्वारा इन हिंसक दावों की कोई पुष्टि नहीं की गई है।

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