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    हिमाचल में प्रकृति का कहर, फ्लैश फ्लड में सड़कें और पेयजल योजनाएं बह गईं

    रिकांगपिओ (किन्नौर): हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले किन्नौर में मानसून की औपचारिक दस्तक से पहले ही प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला है। जिले के निचार खंड के अंतर्गत आने वाले पटवार हलका नातपा के उपमहाल काचरंग क्षेत्र में देर रात बादल फटने (Cloudburst) से काचरंग नाले में भीषण बाढ़ (Flash Flood) आ गई। रात करीब 3 बजे आए इस मलबे और पानी के तेज बहाव ने क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है, जिससे स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

    सड़क मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त, संपर्क टूटा

    बाढ़ का वेग इतना तेज था कि इसके साथ आए भारी मलबे और पत्थरों के कारण स्थानीय मुख्य सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त और बाधित हो गई है। सड़क बह जाने से काचरंग क्षेत्र का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है।

    पेयजल योजना ठप, गहराया पानी का संकट

    इस प्राकृतिक आपदा का सबसे बड़ा असर क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं पर पड़ा है। बाढ़ के कारण जलशक्ति विभाग की मुख्य पेयजल पाइपलाइनें कई जगहों से टूट गई हैं। इसके साथ ही पानी की आपूर्ति करने वाले दो प्रमुख 'इंटेक टैंक' (Intake Tanks) भी मलबे में दबकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इस वजह से पूरे क्षेत्र में पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

    सेब के बगीचों को नुकसान, लाखों की चपत

    काचरंग नाले से निकले मलबे और बाढ़ के पानी ने आस-पास के कृषि और बागवानी क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले लिया। मलबे के खेतों और बगीचों में घुसने से नकदी फसल विशेषकर सेब के पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों पर सेब के लदे हुए पेड़ जड़ से उखड़ गए या टूट गए हैं, जिससे स्थानीय बागवानों को लाखों रुपये के आर्थिक नुकसान की आशंका है।

    रिहायशी इलाके सुरक्षित, कोई जनहानि नहीं

    राहत की खबर: इस पूरी आपदा में सबसे गनीमत की बात यह रही कि किसी भी प्रकार की जनहानि (जान-माल का नुकसान) नहीं हुई है। बाढ़ का रुख रिहायशी बस्तियों की तरफ नहीं मुड़ा, जिसके चलते ग्रामीणों के घर पूरी तरह सुरक्षित बच गए।

    फिलहाल, स्थानीय प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और राजस्व विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्र में हुए वास्तविक नुकसान का सटीक आकलन करने में जुट गई हैं। वहीं, स्थानीय निवासियों ने सरकार और प्रशासन से बंद पड़े सड़क मार्ग को जल्द से जल्द बहाल करने और पेयजल व्यवस्था को तुरंत सुचारू करने की पुरजोर मांग की है।

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