यरूशलम| इजराइल के नेगेव क्षेत्र में रहने वाले बदू (बेडोइन) समुदाय ने हालिया राजनीतिक और स्थानीय चुनावों में अभूतपूर्व एकजुटता और राजनीतिक सक्रियता का परिचय दिया है। उम्म खालिद फतून नामक स्थानीय महिला जब पिछले वर्ष युद्ध पीड़ितों के सहायता केंद्र से स्वयंसेवा कर अपने घर लौटीं, तो उन्होंने देखा कि सुरक्षा बलों की निगरानी में बुलडोजर उनके बेटे के आवास को पूरी तरह ध्वस्त कर रहे थे। इस दंडात्मक कार्रवाई के दौरान उन्हें अपने घर का कीमती फर्नीचर या सोलर पैनल तक सुरक्षित बाहर निकालने का अवसर नहीं दिया गया। इसी गहरी नाराजगी और पीड़ा को आधार बनाते हुए उन्होंने और अन्य स्थानीय महिलाओं ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सत्तारूढ़ गठबंधन, विशेषकर राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर की नीतियों के विरोध में मतदान करने का दृढ़ संकल्प लिया।
बदू महिलाओं का जागरूकता अभियान और मतदान प्रतिशत में तीन गुना वृद्धि
चुनाव से कुछ सप्ताह पूर्व उम्म खालिद फतून ने बदू समुदाय की महिलाओं को उनके मौलिक अधिकारों, राजनीतिक शक्ति और मतदान के महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए जमीनी स्तर पर एक व्यापक अभियान का श्रीगणेश किया। इस अथक प्रयास के बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आए, जिसके फलस्वरूप दक्षिणी नेगेव क्षेत्र के कई बदू गांवों में इस बार मतदान का प्रतिशत तीन गुना तक बढ़ गया। 'अल-नश्मियात' नामक इस सशक्त अभियान का नेतृत्व करने वाली प्रमुख वकील हनान अलसनाह ने कहा कि वर्षों के दमनकारी और हिंसक प्रशासनिक रवैये ने इस रूढ़िवादी समुदाय में वैचारिक परिवर्तन के द्वार खोल दिए हैं। उन्होंने महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि समुदाय के सभी पुरुष भी मताधिकार का प्रयोग कर लें, तब भी वे आबादी का आधा हिस्सा ही रहेंगे, इसलिए अधिकारों की रक्षा के लिए महिलाओं को अपने हर एक वोट की ताकत का पूरा इस्तेमाल करना होगा।
बदू समुदाय की किंगमेकर भूमिका और शानदार मतदान रिकॉर्ड
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस चुनाव में बदू मतदाताओं के भारी उत्साह ने इस्राइली संसद (नेसेट) में अरब राजनीतिक दलों को कुल 19 सीटें दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे वे सत्ता के समीकरण में किंगमेकर की स्थिति में पहुंच गए। इन क्षेत्रों में नागरिकों का राजनीतिक जोश इस बात से स्पष्ट होता है कि बदू बस्तियों में न्यूनतम मतदान 62 प्रतिशत जबकि अधिकतम मतदान 93 प्रतिशत तक दर्ज किया गया। मतदाताओं के इसी अप्रत्याशित समर्थन के बल पर 'रआम' पार्टी ने तमाम चुनावी पूर्वानुमानों को पीछे छोड़ते हुए शानदार सफलता हासिल की।
राजनीतिक गतिरोध और सीधे प्रधानमंत्री चुनने संबंधी नए विधेयक पर विचार
दूसरी ओर, इजराइल की राजनीति में सरकार गठन के दौरान उत्पन्न होने वाले लंबे गतिरोध को समाप्त करने के लिए अब नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, विपक्षी दल अब अरब पार्टियों के समर्थन पर निर्भर रहे बिना एक अल्पमत सरकार का गठन करने के लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री पद के निर्वाचन से संबंधित एक नया विधेयक लाने पर विचार कर रहे हैं। यदि इस तरह का कोई प्रस्ताव संसद में पारित होता है और लागू किया जाता है, तो भविष्य में मतदाता पारंपरिक दलीय व्यवस्था से हटकर सीधे तौर पर देश के प्रधानमंत्री पद के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।


