नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई तीन-भाषा नीति पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। यह नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए लागू होने जा रही है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे पहले से लंबित इसी तरह की अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर पहले ही विस्तार से बहस हो चुकी है, इसलिए फिलहाल इस पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई जा सकती।
एनजीओ ने क्रियान्वयन के तरीके को दी चुनौती
यह याचिका 'Friends of People for Active Democracy' नामक एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) द्वारा दायर की गई है। संगठन के वकील ने कोर्ट में रुख साफ करते हुए कहा कि वे तीन-भाषा नीति का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि इसे जिस तरीके से लागू किया जा रहा है, उस प्रक्रिया को चुनौती दे रहे हैं। सुनवाई के दौरान पीठ ने मजाकिया लहजे में संगठन के नाम पर टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या यह नाम लोगों के मन में डर पैदा करने के लिए रखा गया है? इस पर वकील ने स्पष्ट किया कि यह साल 2013 से काम कर रहा एक पुराना और प्रतिष्ठित ट्रस्ट है।
सरकार और सीबीएसई से तैयारियों पर मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख तय की है। इससे पहले 27 मई को कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए हामी भरते हुए केंद्र सरकार, सीबीएसई और एनसीईआरटी (NCERT) को नोटिस जारी किया था और दो हफ्ते के भीतर जवाब मांगा था। अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी से यह भी पूछा था कि इस नई नीति को जमीन पर उतारने के लिए सीबीएसई की तैयारियां किस स्तर पर हैं और इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे।
जानिए क्या है सीबीएसई की नई तीन-भाषा नीति?
सीबीएसई के नए नियमों के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य हो जाएगा, जिनमें से कम से कम दो भाषाओं का भारतीय मूल का होना जरूरी है। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE) 2023 के तहत स्कूली स्तर पर भाषा की समझ और सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। अगर कोई छात्र विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है, तो वह दो भारतीय भाषाएं चुनने के बाद ही इसे तीसरी या चौथी अतिरिक्त भाषा के रूप में चुन सकेगा।
कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में नहीं होगा तीसरी भाषा का पेपर
छात्रों को तनाव से बचाने के लिए बोर्ड ने एक बड़ा राहत भरा फैसला लिया है। कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का कोई लिखित पेपर नहीं होगा। इसका मूल्यांकन पूरी तरह से स्कूल के स्तर पर ही किया जाएगा और मिले अंकों को सीबीएसई के सर्टिफिकेट में दर्ज कर दिया जाएगा। बोर्ड ने यह भी साफ कर दिया है कि किसी भी छात्र को तीसरी भाषा में प्रदर्शन के आधार पर कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा।
शिक्षकों की कमी दूर करने के विकल्प और विशेष छूट
जिन स्कूलों में संबंधित भारतीय भाषाओं के योग्य शिक्षक नहीं होंगे, वहां काम चलाने के लिए दूसरे विषयों के उन शिक्षकों की मदद ली जा सकेगी जिन्हें उस भाषा का व्यावहारिक ज्ञान हो। इसके अलावा स्कूल आपस में संसाधन साझा कर सकेंगे, ऑनलाइन या हाइब्रिड क्लास चला सकेंगे और रिटायर्ड शिक्षकों या योग्य पोस्ट ग्रेजुएट उम्मीदवारों को रख सकेंगे। दिव्यांग छात्रों को कानून के अनुसार जरूरी रियायतें मिलेंगी, जबकि विदेश से लौटने वाले छात्रों को परिस्थितियों के आधार पर दो भारतीय भाषाएं पढ़ने की अनिवार्यता से छूट दी जा सकती है।
गणित और विज्ञान विषयों में भी दिखेगा बड़ा बदलाव
भाषाओं के अलावा सीबीएसई ने अप्रैल 2026 में यह भी एलान किया था कि सत्र 2026-27 से कक्षा 9 में गणित और विज्ञान के लिए दो-स्तरीय (Two-Level) व्यवस्था लागू होगी। इसके तहत दोनों विषयों में एक अनिवार्य 'स्टैंडर्ड' स्तर और एक वैकल्पिक 'एडवांस्ड' स्तर होगा। सभी छात्रों को 80 अंकों की सामान्य परीक्षा तो देनी ही होगी, लेकिन जो छात्र विषय में ज्यादा रुचि रखते हैं, वे अपनी गहरी समझ और उच्च स्तर के कौशल को साबित करने के लिए एक अतिरिक्त एडवांस्ड पेपर भी दे सकेंगे।


