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    शी जिनपिंग की यात्रा से पहले उत्तर कोरिया का बड़ा कदम: किम जोंग उन ने समुद्र में दिखाई नए युद्धपोत की ताकत

    प्योंगयांग |  उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने देश के नवनिर्मित 5,000 टन क्षमता वाले विनाशक युद्धपोत 'कांग कोन' के समुद्री परीक्षणों का जायजा लिया। इस मौके पर उन्होंने अपनी नौसेना को परमाणु हथियारों से लैस करने और इसके आधुनिकीकरण की मुहिम को और तेज करने की प्रतिबद्धता जताई। आधिकारिक मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, किम ने युद्धपोत का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद कहा कि उत्तर कोरिया को एक ऐसी अजेय समुद्री ताकत के रूप में उभरना होगा, जो समंदर की सतह और गहराई दोनों जगहों से दुश्मनों के किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब दे सके।

    सैन्य आधुनिकीकरण और पांच वर्षीय रक्षा योजना

    किम जोंग उन ने स्पष्ट किया कि सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की नई पांच वर्षीय सैन्य रणनीति में नौसैनिक बेड़े के कायाकल्प पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत आने वाले समय में 10,000 टन श्रेणी के विशालकाय युद्धपोतों का निर्माण किया जाएगा और पानी के भीतर मार करने वाले अत्याधुनिक हथियारों को विकसित किया जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि देश की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत बनाने में नौसेना बेहद अहम भूमिका निभाएगी। इस निरीक्षण के दौरान किम की बेटी किम जू ए भी उनके साथ नजर आईं, जिन्हें दक्षिण कोरियाई रणनीतिकार उनके भविष्य के उत्तराधिकारी के तौर पर देख रहे हैं।

    चीनी राष्ट्रपति की आगामी यात्रा और परमाणु विस्तार

    उत्तर कोरिया का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सोमवार को प्योंगयांग के दौरे पर पहुंचने वाले हैं। इससे पहले उत्तर कोरिया ने अपने एक नए यूरेनियम संवर्धन संयंत्र को दुनिया के सामने पेश किया था, जहां किम जोंग उन ने देश के परमाणु जखीरे को अप्रत्याशित रूप से बढ़ाने की बात कही थी। विश्लेषकों का मानना है कि शी जिनपिंग की यात्रा से ठीक पहले अपनी सैन्य ताकत का यह प्रदर्शन बेहद महत्वपूर्ण है।

    युद्धपोत का इतिहास और भविष्य की सैन्य रूपरेखा

    'कांग कोन' उत्तर कोरियाई नौसेना के बेड़े में शामिल होने वाला दूसरा आधुनिक विध्वंसक पोत है। पिछले साल इसके जलावतरण के दौरान कुछ तकनीकी खामियां आ गई थीं, जिससे इसे क्षति पहुंची थी और उस वक्त किम ने इस लापरवाही को एक गंभीर अपराध माना था। अब पूरी तरह मरम्मत होने के बाद इसे दोबारा परीक्षण के लिए समंदर में उतारा गया है, हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञ अभी भी इसकी वास्तविक युद्ध क्षमताओं को लेकर संशय में हैं। इस बीच, उत्तर कोरिया ने एलान किया है कि वह भविष्य में इसी क्षमता वाले दो और नए युद्धपोत तैयार करने पर काम कर रहा है।

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