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    अब 5वीं और 8वीं तक मिलेगा फाउंडेशनल लर्निंग का लाभ, ‘निपुण भारत’ का विस्तार

    प्रदेश के स्कूलों में अब निपुण भारत मिशन का दायरा और बड़ा होने जा रहा है। जहां पहले तक यह कार्यक्रम कक्षा एक से तीन तक के बच्चों पर केंद्रित था, वहीं अब जुलाई से कक्षा पांचवीं और आठवीं के विद्यार्थियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य छठी और नौवीं कक्षा के कमजोर शैक्षिक प्रदर्शन को सुधारना है।

    निपुण (नेशनल इनिशिएटिव फार प्रोफिशिएंसी इन रीडिंग विद अंडरस्टैंडिंग एंड न्यूमेरेसी) को पांच जुलाई 2021 को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया था। प्रदेश में यह मिशन बेसिक शिक्षा विभाग के माध्यम से चलाया जा रहा है। इसका मकसद है कि कक्षा तीन तक के सभी बच्चों को भाषा और गणित में बुनियादी दक्षता दिलाई जाए।

    निपुण के तहत बच्चों का नियमित आकलन (असेसमेंट) होता है। उनकी पढ़ने, समझने और गणना करने की क्षमता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाता है, बच्चों के लिए विशेष कार्य पुस्तिकाएं (वर्कबुक) तैयार होती हैं और उन्हें धीरे-धीरे तय दक्षता स्तर तक पहुंचाया जाता है। यही कारण है कि तीसरी कक्षा में यूपी के बच्चे अब राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

    छठी और नौवीं कक्षा में दिखी गिरावट

    अभी‘परख’ 2024 राष्ट्रीय मूल्यांकन सर्वेक्षण में यह देखा गया कि तीसरी कक्षा के बच्चे राष्ट्रीय औसत से आगे निकल गए, लेकिन छठी और नौवीं कक्षा में यूपी के बच्चे पीछे रह गए। छठी कक्षा के बच्चे राष्ट्रीय औसत से एक से दो प्रतिशत पीछे रहे।

    वहीं, नौवीं कक्षा में भाषा, गणित, विज्ञान व सामाजिक विज्ञान में यूपी का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से तीन से छह प्रतिशत पीछे रहा है।इससे माना गया है कि बुनियादी समझ की कमी आगे की कक्षाओं में बच्चों के प्रदर्शन को प्रभावित कर रही है।

    नियमित होगा मूल्यांकन

    महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा का कहना है कि निपुण का दायरा अब पांचवीं और आठवीं कक्षा तक बढ़ाया जाएगा। इन कक्षाओं में बच्चों का अलग तरह से मूल्यांकन किया जाएगा।वार्षिक परीक्षा में प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता सुधारी जाएगी। बच्चों की भाषा और गणितीय समझ पर विशेष फोकस रहेगा।

    शिक्षकों को नई रणनीतियों से प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे जैसे तीसरी कक्षा में निपुण के जरिये बच्चों की समझ और प्रदर्शन बेहतर हुआ, वैसे ही पांचवीं और आठवीं के बच्चों की बुनियादी शिक्षा में सुधार होगा और आगे चलकर यह छठी और नौवीं में उनके प्रदर्शन को बेहतर बनाएगा।

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