अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे और दान के पैसों में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच, अब मंदिर आने वाले भक्तों की तादाद और दान-दक्षिणा के ग्राफ में भारी गिरावट देखी जा रही है। बीते कुछ महीनों का रिकॉर्ड देखें तो मंदिर को हर महीने औसतन करीब सात करोड़ रुपये का दान मिल रहा था, जो पिछले दो हफ्तों में सिमटकर महज डेढ़ करोड़ रुपये के आसपास रह गया है। हालांकि, राम मंदिर ट्रस्ट लगातार यह दलील दे रहा है कि दान राशि को इकट्ठा करने और उसकी गिनती की पूरी व्यवस्था पूरी तरह से पारदर्शी और सुरक्षित है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि इस विवाद की वजह से श्रद्धालुओं के मन में संशय पैदा हुआ है।
कीमती आभूषणों और नकदी में हेरफेर की आशंका
मंदिर के खजाने में हेराफेरी और गबन के इस संवेदनशील मामले में विशेष जांच टीम (SIT) की तफ्तीश लगातार चौथे दिन भी जारी रही। जांच के दौरान ट्रस्ट के मुख्य पदाधिकारी चढ़ावे में आए सोने, चांदी और हीरे के कीमती जेवरातों का सही ब्योरा देने में नाकाम रहे हैं। ऐसे में अब यह अंदेशा गहरा गया है कि सिर्फ करोड़ों की नकदी ही गायब नहीं हुई, बल्कि बेशकीमती गहनों के रिकॉर्ड में भी बड़ी गड़बड़ी की गई है। एसआईटी की टीम सबूत जुटाने के लिए सुबह से लेकर देर रात तक मैराथन पूछताछ में जुटी हुई है।
ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों से तीखे सवाल-जवाब
जांच की इसी कड़ी में एसआईटी ने केरल से अयोध्या पहुंचे ट्रस्ट के अधिकारी अनिल मिश्रा से करीब तीन घंटे तक गहन पूछताछ की। इसके अलावा, टीम ने गोपाल राव और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को भी सवालों के घेरे में लिया। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, एसआईटी को नकदी के रखरखाव और उसके दस्तावेजी रिकॉर्ड में कई गंभीर खामियां और विसंगतियां मिली हैं।
जमीन खरीद के दस्तावेजों की बारीकी से स्क्रूटनी
दूसरी तरफ, जांच दल ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा साल 2021 से लेकर अब तक खरीदी गई संपत्तियों और जमीनों से जुड़ी फाइलों को अपने कब्जे में लेकर उनकी जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी यह कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है कि क्या दान में आई रकम का इस्तेमाल इन जमीनों को खरीदने में किया गया था। टीम जमीन की खरीद प्रक्रिया, उसकी सरकारी कीमत (सर्किल रेट), पेमेंट के तरीकों और इसमें शामिल बिचौलियों की भूमिका को खंगाल रही है। इस मामले में तीन संदिग्धों से पूछताछ भी हुई है, क्योंकि कुछ जमीनों के बाजार भाव और कागजी कीमत में भारी अंतर देखने को मिला है।


