शेयर बाजार में हाहाकार और प्रमुख सूचकांकों का गोता
नई दिल्ली:वैश्विक अनिश्चितता का सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर दिखाई दिया, जहां सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही प्रमुख सूचकांक भारी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। सेंसेक्स में 550 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, जिसके चलते यह 74,700 के स्तर के आसपास आ गया है। इसी तरह निफ्टी भी लगभग 200 अंक टूटकर 23,450 के स्तर के बेहद करीब पहुंच चुका है। बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह बैंकिंग क्षेत्र, विशेषकर सरकारी बैंकों के शेयरों में देखी जा रही भारी बिकवाली है। जानकारों का मानना है कि बाजार इस समय बेहद संभलकर चलने की कोशिश कर रहा है। निफ्टी के लिए ऊपर की तरफ 24,000 और 24,250 का स्तर एक बड़ी रुकावट बना हुआ है, जबकि नीचे की तरफ 23,250 और 23,000 के स्तरों पर इसे सहारा मिलने की उम्मीद है। यदि बाजार 23,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़ता है, तो बिकवाली का दबाव और अधिक गहरा सकता है, इसलिए ट्रेडर्स को इस उतार-चढ़ाव भरे माहौल में सख्त स्टॉप-लॉस का पालन करने की सलाह दी जा रही है।
कच्चे तेल में उबाल और अमेरिकी चेतावनी से बढ़ा तनाव
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उछाल आया है और क्रूड ऑयल दो प्रतिशत की बढ़त के साथ 111 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। कीमतों में आई इस ताजा तेजी के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का वह कड़ा बयान है, जिसमें उन्होंने ईरान को शांति समझौते के लिए खुली चेतावनी दी है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखते हुए कहा कि ईरान के लिए समय तेजी से निकल रहा है और यदि उसने जल्द ही कदम नहीं उठाए तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं। दरअसल, पिछले हफ्ते अमेरिका द्वारा रखे गए शांति प्रस्ताव को ईरान ने ठुकरा दिया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच परमाणु हथियारों की क्षमता को लेकर चल रहा विवाद और गहरा गया है। पिछले बारह हफ्तों से जारी इस तनाव के कारण कमोडिटी बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, जिससे ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है।
ऐतिहासिक निचले स्तर पर रुपया और विदेशी निवेशकों का पलायन
वैश्विक परिस्थितियों के दबाव में भारतीय मुद्रा में भी रिकॉर्ड कमजोरी देखने को मिल रही है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया आज शुरुआती कारोबार में ही 20 पैसे कमजोर होकर 96.18 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। पिछले कुछ दिनों से डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार गिरावट का दौर जारी है। इस मुद्रा संकट को बढ़ावा देने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भूमिका भी अहम रही है, जिन्होंने पिछले तीस दिनों के भीतर भारतीय बाजार से लगभग 55 हजार करोड़ रुपये के शेयर बेचकर अपनी पूंजी बाहर निकाल ली है। हालांकि, इस दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाजार को संभालने के लिए खरीदारी जरूर की है, लेकिन वैश्विक बाजारों से मिल रहे नकारात्मक संकेतों और एशियाई बाजारों, जैसे जापान के निक्केई और हॉन्गकॉन्ग के हैंगसेंग में आई गिरावट के चलते घरेलू बाजार पर दबाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है।


