सदन में हर सदस्य को बोलने का अधिकार, प्रधानमंत्री को भी लेनी होती है अनुमति
जयपुर। लोकसभा अध्यक्ष पद दोबारा संभालने के बाद ओम बिरला ने संसद की कार्यप्रणाली और नियमों को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सदन नियमों के आधार पर चलता है और चाहे सदन के नेता हों या प्रतिपक्ष के नेता, सभी को नियमों के तहत ही बोलने का अधिकार होता है।
ओम बिरला ने कहा कि प्रतिपक्ष का नेता भी सदन से ऊपर नहीं है और सभी सदस्यों के लिए समान नियम लागू होते हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा के नियम न तो सरकार ने बनाए हैं और न ही विपक्ष ने, बल्कि यह उन्हें विरासत में मिले हैं और उन्हीं नियमों के आधार पर सदन का संचालन किया जाता है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि अध्यक्ष के निर्णय से कोई भी सदस्य सहमत या असहमत हो सकता है, लेकिन सदन की मर्यादा बनाए रखने के लिए कई बार कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आसन के पास किसी भी सदस्य का माइक ऑन या ऑफ करने का कोई बटन नहीं होता। जो सदस्य नियमों के तहत बोलते हैं, उन्हीं का माइक सक्रिय रहता है।
अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज बनने का प्रयास
ओम बिरला ने कहा कि लोकसभा देश के 140 करोड़ नागरिकों की संप्रभु इच्छा का प्रतिनिधित्व करती है। हर सांसद अपने क्षेत्र की समस्याएं और जनता की उम्मीदें लेकर सदन में आता है। ऐसे में यह प्रयास रहता है कि सभी सदस्यों को नियमों के तहत अपनी बात रखने का अवसर मिले।
उन्होंने कहा कि लोकसभा का उद्देश्य समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज बनना है और लोकतंत्र की भावना को मजबूत करना है।
प्रधानमंत्री को भी लेनी होती है अनुमति
भेदभाव के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए ओम बिरला ने कहा कि सदन के नेता, प्रतिपक्ष के नेता, मंत्री या अन्य सदस्य सभी को सदन के नियमों और प्रक्रिया के तहत ही बोलने का अधिकार होता है। सभी के लिए समान नियम लागू हैं और कोई भी सदस्य नियमों से ऊपर नहीं है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि चाहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही क्यों न हों, यदि उन्हें सदन में वक्तव्य देना होता है तो उन्हें भी अध्यक्ष से अनुमति लेनी पड़ती है।
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