संकट को लेकर विपक्ष का सरकार पर हमला, राहुल गांधी ने विदेश नीति पर उठाए सवाल
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भले ही गिर गया हो, लेकिन विपक्षी दलों ने अब सरकार को घेरने के लिए नई रणनीति तैयार कर ली है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल अब पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से उत्पन्न ईंधन संकट और देश में रसोई गैस (एलपीजी) की कथित किल्लत को लेकर सरकार पर हमला बोलने की तैयारी में हैं।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका असर अब भारत में भी देखने को मिल रहा है, जहां रसोई गैस की आपूर्ति और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस सांसदों की बैठक में कहा कि पार्टी इस मुद्दे को संसद में प्रमुखता से उठाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि युद्ध के कारण एलपीजी की कमी और ईंधन संकट से आम जनता प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही महंगाई और हवाई किराए में भी अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिल रही है।
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार अमेरिका के दबाव में काम कर रही है और देश की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने में विफल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है और वहां जारी युद्ध के कारण कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति बाधित हुई है।
संसद के भीतर इस मुद्दे को लेकर पहले ही तीखी बहस शुरू हो चुकी है। सोमवार और मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने एलपीजी संकट को लेकर सदन में जोरदार हंगामा किया, जिसके चलते कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।
कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने मांग की कि सरकार को अन्य मुद्दों को छोड़कर सबसे पहले रसोई गैस की कीमतें कम करने और उसकी आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए। वहीं कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर से घटकर 90 डॉलर प्रति बैरल हो चुकी हैं, तो सरकार के भीतर इतनी घबराहट क्यों है।
सीपीआई(एम) नेता जॉन ब्रिट्टास ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार पर्याप्त गैस स्टॉक होने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी स्थिति इससे अलग है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार को युद्ध को रोकने के लिए प्रभावी कूटनीतिक प्रयास करने चाहिए थे, लेकिन वह इस मामले में निष्क्रिय बनी हुई है।
अब देखना यह होगा कि सरकार संसद में विपक्ष के इन आरोपों और सवालों का क्या जवाब देती है।
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