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    मालेगांव ब्लास्ट केस में बरी होने पर साध्वी प्रज्ञा बोलीं- भगवा और हिंदुत्व की जीत हुई

    मुंबई: चर्चित मालेगांव ब्लास्ट मामले में पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा आरोप मुक्त हो गई. पिछले 17 सालों से वह इस दिन का इंतजार कर रही थी. अदालत का फैसला सुनाए जाने पर उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक आए.

    मुंबई एनआईए विशेष अदालत के फैसले पर खुशी व्यक्त करते हुए साध्वी प्रज्ञा ने कहा, 'भगवा और हिंदुत्व की जीत हुई है. विस्फोटों में असली दोषियों को सजा मिलेगी. फैसले के बाद रोते हुए प्रज्ञा ने कहा, 'भगवा को उन्होंने साजिश के तहत बदनाम किया, आज भगवा की जीत हुई है और हिंदुत्व की जीत हुई है और जो लोग दोषी हैं उन्हें भगवान सजा देंगे. लेकिन जिन्होंने भारत और भगवा दोनों को बदनाम किया, वे आपके द्वारा गलत साबित नहीं हुए हैं. मैं आपको (न्यायाधीश अभय लोहाटी को) धन्यवाद देती हूं.'

    2008 के मालेगांव विस्फोट मामले को 2011 में महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) से एनआईए को सौंप दिया गया था. 17 साल के लंबे इंतजार और सैकड़ों गवाहों की सुनवाई के बाद एनआईए की विशेष अदालत ने आज गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और अन्य सभी आरोपों के तहत सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया.

    जांच के दौरान उन्हें किस तरह 'प्रताड़ित' किया गया, इसका विवरण देते हुए पूर्व सांसद ने वही बात दोहराई जो उन्होंने पहले कही थी कि आरोपियों को फंसाने के लिए जांच पर दबाव डाला गया था. उन्होंने कहा, 'मैंने शुरू से ही कहा है कि जिन्हें भी जांच के लिए बुलाया जाता है, उनके पीछे कोई आधार होना चाहिए.'

    उन्होंने आगे कहा,'मुझे जांच के लिए बुलाया गया और गिरफ्तार कर लिया गया तथा प्रताड़ित किया गया. इससे मेरा पूरा जीवन बर्बाद हो गया. मैं एक साधु का जीवन जी रही थी, लेकिन मुझ पर आरोप लगा दिए गए और कोई भी हमारे साथ खड़ा नहीं हुआ. मैं जीवित हूं क्योंकि मैं एक संन्यासी हूं, मैं हर दिन मरते हुए अपना जीवन जी रही हूं.'

    अदालत में पूर्व सांसद को उनकी स्वास्थ्य स्थिति के कारण आरोपी के बजाय गवाह के कटघरे में बैठने की अनुमति दी गई. एक अन्य बरी किए गए मेजर (सेवानिवृत्त) रमेश उपाध्याय ने फैसले पर राहत व्यक्त की और शारीरिक, मानसिक और वित्तीय यातना का भी आरोप लगाया.

    उन्होंने कहा, 'हमें शारीरिक, मानसिक और आर्थिक यातनाओं समेत हर तरह की यातना सहनी पड़ी. हमने स्वेच्छा से नार्को टेस्ट कराया, लेकिन उस पर भरोसा नहीं किया गया क्योंकि यह अभियोजन पक्ष के मामले के अनुकूल नहीं था. मुझे खुशी है कि अदालत ने हमें राहत दी. मैं आभारी हूं कि यह कलंक हमारे जीवन से मिट जाएगा.' लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित ने भी न्याय प्रणाली में उनका विश्वास बहाल करने के लिए अदालत का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा, 'मैं व्यवस्था में आम आदमी का विश्वास फिर से बहाल करने के लिए आपका धन्यवाद करता हूं.

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