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    शहीद दिवस पर सरकार ने दिखाई सख्ती, नौहट्टा इलाके की सड़कें सील कर एनसी नेताओं को कर दिया नजरबंद 

    श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 13 जुलाई शहीद दिवस के मौके पर श्रीनगर के संवेदनशील नौहट्टा इलाके की ओर जाने वाली सभी सड़कों को सील कर दिया। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए केवल अधिकारियों और सुरक्षाबलों के वाहनों को ही इन मार्गों से गुजरने की अनुमति दी गई। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) ने दावा किया कि उनके कई वरिष्ठ नेताओं को नजरबंद कर दिया गया। शहर के ख्वाजा बाजार स्थित ऐतिहासिक शहीदों के कब्रिस्तान तक जाने के लिए हर साल की तरह इस बार भी एनसी ने श्रद्धांजलि अर्पित करने की अनुमति मांगी थी, जिसे जिला प्रशासन ने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद श्रीनगर पुलिस ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सार्वजनिक परामर्श जारी कर नागरिकों को इन क्षेत्रों की ओर न जाने की सलाह दी। यहां पुलिस ने सख्त चेतावनी दी कि जिला प्रशासन के आदेशों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा को देखते हुए श्रीनगर के सभी प्रवेश मार्गों पर भारी पुलिस बल और केंद्रीय अर्धसैनिक बल तैनात किए गए। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने प्रशासन के इस कदम की निंदा की है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कहा कि 13 जुलाई कोई आम दिन नहीं है, बल्कि यह न्याय और अधिकारों के लिए बलिदान देने वालों की स्मृति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी लोग हर हाल में अपने शहीदों का सम्मान करते रहेंगे। सादिक ने दावा किया कि उन्हें और उनके कई सहयोगियों को शनिवार रात से नजरबंद कर दिया गया है। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को अनावश्यक, अनुचित और असंवेदनशील बताया।

    क्यों होता है शहीद दिवस 
    गौरतलब है कि 13 जुलाई 1931 को महाराजा हरि सिंह के शासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे 22 कश्मीरियों की डोगरा सेना की गोलीबारी में मौत हो गई थी। इस घटना को कश्मीर के राजनीतिक इतिहास में निर्णायक मोड़ माना जाता है। एनसी और कुछ अन्य इसे शहीद दिवस के तौर पर मनाते हैं और गोलीबारी में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इस बार प्रशासन की सख्ती को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है, और एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के बीच संतुलन बना पाना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है?

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