मधुबनी। शहर के सदर अस्पताल परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब इलाज के दौरान एक ग्यारह साल के बच्चे की सांसें थम गईं। मौत की खबर मिलते ही भड़के परिजनों ने चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए भारी उपद्रव मचाया। इस दौरान अस्पताल के भीतर जमकर तोड़फोड़ की गई और चिकित्सा कर्मियों पर गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए। मृत मिलने वाले बालक की पहचान राजनगर थाना क्षेत्र के सिमरी गांव के रहने वाले राकेश कुमार के रूप में की गई है, जिसके बाद से पूरे इलाके और अस्पताल परिसर में घंटों तक भारी तनाव बना रहा।
सड़क हादसे के बाद लाया गया था अस्पताल
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह मासूम बच्चा कुछ समय पूर्व एक सड़क हादसे का शिकार होकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। परिजनों द्वारा उसे सबसे पहले किसी नजदीकी चिकित्सा केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार देने के बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे मधुबनी सदर अस्पताल रेफर कर दिया था। अस्पताल पहुंचने के बाद उसका उपचार शुरू तो किया गया, लेकिन उसकी नाजुक हालत में सुधार नहीं हो सका। पीड़ित परिवार का कड़ा आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद वहां मौजूद चिकित्सकीय अमले ने उचित ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण बच्चे की जान चली गई।
उपचार के दौरान लापरवाही का गंभीर आरोप
बच्चे के दुनिया से चले जाने के बाद परिवार के सब्र का बांध टूट गया और वे उग्र रूप धारण कर बैठे। परिजनों का कहना था कि यदि समय रहते डॉक्टरों ने सही उपचार किया होता तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। उनका आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने पूरी तरह से उदासीनता दिखाई और उनकी गुहार को अनसुना कर दिया। इसी उपेक्षा और गुस्से के परिणाम स्वरूप स्थिति हाथ से निकल गई और परिजनों ने अस्पताल के अंदर रखे फर्नीचर व अन्य साजो-सामान को तोड़ना शुरू कर दिया, जिससे अस्पताल का एक बड़ा हिस्सा रणक्षेत्र में बदल गया।
ड्यूटी पर तैनात कर्मियों के साथ मारपीट और उपद्रव
गुस्से में आए लोगों ने न सिर्फ अस्पताल की संपत्ति को क्षति पहुंचाई, बल्कि वहां अपनी सेवाएं दे रहे डॉक्टर और सुरक्षा गार्ड को भी अपना निशाना बनाया। ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक एवं सुरक्षाकर्मियों के साथ मारपीट किए जाने की बात सामने आई है। इस अप्रिय स्थिति की भनक लगते ही नगर थाना की पुलिस तुरंत मौके पर जा पहुंची और बिगड़ते हालात को काबू करने की कोशिश की, मगर आक्रोशित भीड़ शांत होने का नाम नहीं ले रही थी। भारी संख्या में पुलिस बल के तैनात होने के बावजूद लगभग छह घंटे तक अस्पताल परिसर में हंगामा और तनाव का यह दौर लगातार जारी रहा।
सिविल सर्जन का बयान और पुलिस बल की तैनाती
पूरी घटना के संबंध में सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि डॉक्टरों द्वारा बच्चे को बचाने के लिए पूरा प्रयास किया गया था, परंतु उसे बचाया नहीं जा सका। उन्होंने इस तरह अस्पताल में तोड़फोड़ मचाने और चिकित्सा कर्मियों से मारपीट करने की घटना को बेहद गलत करार दिया, जिससे सरकारी संपत्ति को भी भारी क्षति पहुंची है। वर्तमान स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखने के लिए अस्पताल परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है और पुलिस प्रशासन इस पूरे मामले की गहराई से जांच-पड़ताल कर रहा है।


